पीलीभीत। टाइगर रिजर्व की जीवनदायिनी माला नदी की बिगड़ती हालत पर शासन सख्त हो गया है। राज्य स्वच्छ गंगा मिशन (एसएमसीजी) ने नदी के स्वास्थ्य और अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरों को लेकर जिला प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। इस पर डीएम ने संबंधित विभागों को एक सप्ताह में स्थिति व कार्ययोजना देने के निर्देश दिए।
माला नदी उत्तराखंड की सीमा से निकलकर पीटीआर के जंगलों में करीब 25 किलोमीटर तक बहती है। क्षेत्र की पारिस्थितिकी के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, लेकिन संरक्षण के अभाव और जल दोहन के कारण इसकी स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। पहले जहां नदी किनारे स्थित झीलें वन्यजीवों का प्रमुख आश्रय स्थल थीं। वहीं, अब अधिकांश झीलें सूख चुकी हैं या सूखने की कगार पर हैं। इससे जलीय जीव-जंतुओं की संख्या भी तेजी से घटी है।
राज्य स्वच्छ गंगा मिशन के प्रोजेक्ट डायरेक्टर जोगिंदर सिंह ने डीएम व जिला गंगा समिति अध्यक्ष ज्ञानेंद्र सिंह से नदी की वर्तमान स्थिति, अतिक्रमण, अवैध निर्माण और पुनरुद्धार की योजना पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इस पर डीएम ने प्रभागीय वनाधिकारी पीटीआर, एसडीएम सदर और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बरेली के क्षेत्रीय अधिकारी को निर्देशित किया है कि वे एक सप्ताह के भीतर नदी की स्थिति, अतिक्रमण हटाने की कार्ययोजना और दीर्घकालिक सुधार उपायों पर रिपोर्ट प्रस्तुत करें। संवाद