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क्लोजर की समय सीमा समाप्त, रजवाहों में शुरू नहीं हो सकी सिल्ट सफाई

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माधोटांडा(पीलीभीत)। नहरों में ‘क्लोजर’ का समय समाप्त हो चुका है। दूसरी तरफ सिंचाई विभाग टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद अब तक कलीनगर और पूरनपुर नहरों में सिल्ट सफाई का काम शुरू तक नहीं कर पाया। इस समय किसानों को गेहूं की फसल में सिंचाई के लिए पानी की जरूरत है। ऐसे में दो ही बातें तय हैं, पहली यह कि अब भी नहर बंद रखकर सफाई कराई तो किसानों को समय पर पानी नहीं मिलेगा और दूसरा यह कि सफाई बिना ही पानी छोड़ दिया जाएगा। दूसरी स्थिति में बजट ठिकाने लग जाएगा।
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कलीनगर और पूरनपुर तहसील क्षेत्र में कृषि की सिंचाई मुख्य रूप से माधोटांडा एवं पूरनपुर रजवाहा और उसकी सहायक छोटी नहरों से की जाती है। बरसात के दौरान पानी के साथ सिल्ट आ जाने से नहर पट जाती हैं। इधर रबी की फसलों में सिंचाई के लिए नहरों की टेल तक पानी पहुंचे, इसके लिए शासन से निर्देश हैं। मगर, सिंचाई विभाग के इंजीनियर इस पर अमल नहीं कर रहे हैं। बरसात खत्म होने के बाद नहरों को बंद कर दिया जाता है। तब फसलों में पानी की जरूरत नहीं होती। क्लोजर नहरों में ही सफाई का काम कराया जाता है। बरसात बीतने के बाद अधिकांश नहरों को बंद कर दिया गया है। मगर, उनमें सफाई शुरू नहीं कराई गई।
बरसात के बाद अक्तूबर में शारदा सागर खंड के अफसरों ने प्रथम चरण में सलेक्शन बांड के तहत माइनरों में सिल्ट सफाई का कार्य शुरू करवा दिया। रजवाहों में सिल्ट सफाई के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी की गई। करोड़ों का बजट ठिकाने लगाने के लिए ठेकेदारों ने माइनरों की सफाई में खानापूरी शुरू कर दी। माइनरों में भी सरकार का करोड़ों का बजट सिल्ट सफाई के नाम पर हड़पने की तैयारी है। उधर, रजवाहों में सफाई शुरु न होने से किसान परेशान है क्योंकि रबी फसलों में पानी की जरूरत है। किसानों का कहना है कि रजवाहों में समय से सफाई न होने से माइनरों में टेल तक पानी नहीं पहुंच पाएगा। गेहूं और रबी की अन्य फसलों में सिंचाई के समय परेशानी होगी।
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माधोटांडा और पूरनपुर रजवाहा से जुड़ी चांदूपुर, देवीपुर, गुलरिया, शेरपुर, जटपुरा, मनहरिया, हरिपुर, प्रसादपुर, गोपालपुर, खमरिया, रामपुर, रंघुनाथपुर, सबलपुर, औरंगाबाद, सिंकदरपुर समेत डेढ़ दर्जन से अधिक माइनरों में सिल्ट सफाई का कार्य शुरू कराया गया। इसमें बहुत सी माइनरें ऐसी थी, जिसमें मजदूरों से कार्य कराया गया। खानापूर्ति के चलते कहीं माइनरों के बीच भाग में मात्र घास काटकर छिलाई ही की गई है। अधिकांश नहरों में जेसीबी बिना चले ही सफाई की खानापूरी कर बजट खपाने की कार्ययोजना ठेकेदारों और सिंचाई विभाग के इंजीनियरों ने मिलकर बना ली है। अब उस पर केवल अमल होना बाकी है। ठेकेदारों ने मुख्य मार्गो से गुजरने वाली माइनरों पर सिल्ट सफाई गुणवत्ता से की, लेकिन दूर-दराज इलाकों की नहरें ऐसे ही छोड़ दीं, ताकि अफसरों को यही काम निरीक्षण में दिखाए जा सकें।
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