पीलीभीत। वन और वन्यजीवों की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं रोकने के लिए पीटीआर के साथ मिलकर एम थ्री एम संस्था भी काम करेगी। संस्था की ओर से तीन साल के लिए समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह संस्था संसाधनों को मुहैया कराने के साथ जंगल से सटे गांवों के लोगों को जागरूक कर उनके लिए रोजगार के अवसर भी तलाशेगी।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) मुख्यालय में बुधवार को डीएफओ मनीष सिंह की ओर से प्रेसवार्ता कर इस संबंध में जानकारी साझा की गई। डीएफओ ने बताया कि जंगल और उससे सटे इलाके में वन्य जीवन को बेहतर बनाने के लिए एम थ्री एम संस्था आगे आई है। वह संसाधन की कमी को दूर करने के साथ ही अन्य जरूरी सकारात्मक कदम भी उठाएगी। उन्होंने संस्था के प्रयासों पर प्रकाश डालने के साथ ही पहल की सराहना की। संस्था के अध्यक्ष डॉ. ऐश्वर्या महाजन ने बताया कि पीटीआर में वन्य जीवों की सुरक्षा के साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटना को रोकने के लिए काम करेंगे।
इसके लिए जंगल से सटे इलाकों के लोगों से संवाद कर उन्हें जागरूक करने के साथ रोजगार के अवसर भी तलाशे जाएंगे। उन्होंने कहा कि संस्था लद्दाख, उड़ीसा समेत देश के अन्य हिस्सों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और आजीविका के विषय पर काम कर रही है। अब पीटीआर में वन्य जीवन कार्यक्रम की शुरुआत की जा रही है। संस्था के सहयोगी आर्मी में कंप्यूटर मैनेजमेंट स्पेशलिस्ट के पद से सेवानिवृत्त पवन जैदगा ने बताया कि पर्यावरण और वन्यजीवों को बचाने के लिए यह पहल की जा रही है।
उन्होंने कहा कि तीन साल में वन्यजीवों की सुरक्षा और मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं रोकने पर भी जोर दिया जाएगा। इसके लिए लोगों से जुड़कर सुझाव लेने के बाद उसपर अमल भी किया जाएगा।
वॉच टावर, वन चौकी समेत 78 स्थानों पर लगाई जाएंगी सोलर लाइटें
एम थ्री एम संस्था की ओर से पीटीआर के 78 स्थानों पर सोलट लाइटें लगाने का निर्णय लिया गया है। इसमें जंगल के वॉच टावर, चौकी समेत अन्य संवेदनशील स्थान शामिल हैं। प्रकाश व्यवस्था बेहतर होने से अवैध गतिविधियों पर आसानी से नजर रखी जा सकेगी।
फील्ड स्टाफ को दी जाएंगी 50 मेडिकल किट
संस्था की ओर से फील्ड स्टाफ की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 50 मेडिकल किट वितरित की जाएंगी। इसको लेकर बुधवार को संस्था के सदस्यों ने जरूरी जानकारी साझा की। इसके अलावा जल्द ही पीटीआर को थर्मल ड्रोन मुहैया कराने की बात कही। ताकी दिन के अलावा रात में भी बाघ समेत अन्य वन्यजीवों की निगरानी में समस्या न आए।