पीलीभीत। कोरोना वायरस को लेकर स्कूल, पार्क और बाजार सब बंद होने की वजह से घरों में बच्चों का समय प्रबंधन करना मम्मियों के लिए चुनौती बना है। बच्चे घर से बाहर जाने की जिद न करें, इसके लिए उन्हें कोरोना वायरस की भयावहता के बारे में समझा रही हैं। घर में ही रोकने के लिए कवायदें कर रही हैं, मगर घर में रहकर बच्चे कब तक और क्या करें, इसका हल भी नहीं ढूंढ पा रही हैं।
घर पर रहने से बच्चों में चिड़चिड़ापन आ गया है। हर छोटी-छोटी चीज को लेकर झगड़ा करना शुरू कर देते हैं। स्कूल बंद होने के बाद बच्चों की शरारतें हद से ज्यादा बढ़ गई हैं। जरा- जरा सी बात पर आपस में भिड़ जाते हैं। पढ़ते और खाते समय भी झगड़ बैठते है। पूरे दिन मोबाइल और टीवी का पीछा छोड़ने को तैयार नहीं होते। अगर कुछ कह दो तो रोना चीखना शुरू कर देते हैं। घर में बंद रहने से चिड़चिड़ापन अधिक हो गया है। कभी भी घर से बाहर घूमने जाने तक की जिद करने लगते है। इसके लिए कई मम्मियों ने परेशान होकर घर में ही उन्हें लुभाने के लिए पिज्जा, मोमो, बर्गर, पकौड़ी, समोसे अधिक पकवान बनाकर खिलाने के साथ काम निपटाने के बाद बच्चों को आर्ट और क्रॉफ्ट बनाने में व्यस्त रखती हैं। बच्चों के साथ खेलकर भी उन्हें व्यस्त रखने की कोशिश करती हैं, ताकि बच्चे परेशान न हों और वे भी घरों में सुकून से रह सकें।
ये मम्मियां हैं बेमिसाल
कोरोना ने सबको घरों में कैद कर रखा है। बच्चे बाहर जाने की जिद करते हैं। मगर, हम उन्हें घर में ही खेलने को कहते हैं। उनके साथ दिन भर समय बिता रहे हैं। जो मांगते हैं, वह बनाकर खाने को भी देते हैं। -भावना सक्सेना
बच्चों को घर में रखना बड़ा मुश्किल काम है। बच्चों के दिल बहलाने के लिए उनके साथ ज्यादातर समय खेलना पड़ता है। मनपसंद खाना भी बनाते हैं। केक भी बना देते हैं। फिर भी उनकी फरमाइशें खत्म नहीं होती। - रागिनी वर्मा
बच्चे कितनी भी शरारतें करें, लेकिन उन्हें कोरोना के खतरे से तो बचाना ही है। बच्चे बाहर न खेलने जाएं और उन्हें कोरोना संक्रमण से खतरा न हो, इसलिए घर पर ही उन्हें पसंद की चीजें देनी पड़ती हैं। साथ में खेलना भी पड़ता है। पूजा वर्मा
बच्चे तो परेशान करते ही हैं। मगर, यह अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि उन्हें समझाएं। बेटा चाऊमीन की जिद करता है तो उसे वह भी बनाकर देते हैं। बच्चे के लिए केक बनाना भी सीख लिया है। कोल्ड ड्रिंक के बजाय फ्रूट जूस देते हैं। -प्रियंका कौशिक
मनोरोग परामर्शदाता की सलाह- बच्चों को दें ज्यादा समय
लोगों की फिलहाल सामाजिक गतिविधियां रुकी हुई हैं। एक-दूसरे से बातचीत और मिलने-जुलने का दायरा भी सिमट गया है। ऐसे में बच्चों में चिड़चिड़ापन आ जाता है। अभिभावक अपने बच्चों के साथ प्यार से बात करें। उनके साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं, ताकि वे अकेलापन को महसूस न करें। उन्हें घर पर ही स्कूल वाला माहौल देने की कोशिश करें। - पल्लवी सक्सेना, साइको थेरेपिस्ट