पूरनपुर। सादा कपड़ों में बाइक से जाते दो सिपाहियों को पकड़िया चौराहा के पास बिना मास्क देखकर तहसीलदार ने उन पर लाठी चला दी। परिचय देने के बाद भी काफी बहस हुई। इसके बाद साथी पुलिसकर्मी एसडीएम कार्यालय के बाहर इकट्ठे हो गए और तहसीलदार के व्यवहार पर विरोध जताया। एसडीएम कार्यालय में अफसरों के बीच बातचीत के बाद तहसीलदार ने यह कहकर पीछा छुड़ाया कि वह सिपाहियों को पहचानते नहीं थे। परिचय देने तक देर हो चुकी थी। यही बात समझाने पर सिपाही भई मान गए।
घटना सोमवार सुबह करीब 10:30 बजे की है। कोतवाली में तैनात सिपाही बालिस्टर मलिक और दीपक राणा बाइक से बाजार जा रहे थे। बाइक बालिस्टर मलिक चला रहे थे। दोनों सिपाही उस समय सादा कपड़े पहने थे। पकड़िया चौराहा पर लॉकडाउन के नियमों का पालन कराने के लिए खड़े तहसीलदार विजय कुमार त्रिवेदी की नजर उन पर पड़ गई। उन्होंने सिपाहियों को रोकने के बाद मास्क न लगाने और बाइक पर दो लोगों के बैठा होना के कारण उन पर लाठी चला दी। तहसीलदार की लाठी बालिस्टर की पीठ पर लगी। इससे उसकी पीठ पर हाथ रखे सिपाही दीपक राणा के भी चोट आई। सिपाहियों का आरोप है कि अपना परिचय देने के बाद भी तहसीलदार ने अभद्रता की। वह बोले-सिपाही ही तो हो, कोई थानेदार तो नहीं। नियम कानून नहीं मानोगे।
तहसीलदार के व्यवहार से खफा होकर दोनों सिपाही कोतवाली पहुंचे और घटना की जानकारी अपने साथी सिपाहियों के अलावा कोतवाल और सीओ को दी। सीओ योगेंद्र कुमार और कोतवाल एसके सिंह एसडीएम कार्यालय पहुंचे। इसी बीच तमाम पुलिस कर्मी भी एसडीएम कार्यालय के बाहर एकत्र हो गए। एसडीएम के बंद दफ्तर में डेढ़ घंटे तक अफसरों की वार्ता चली। तहसीलदार ने सिपाहियों के वर्दी में न होने, मास्क और हेलमेट न लगा होने, बाइक पर दो लोगों के होने और सिपाहियों द्वारा अपना परिचय न देने का तर्क रखा। फिलहाल, बंद कमरे में बातचीत के बाद मामला निपट गया।
दोनों सिपाही वर्दी में नहीं थे। मास्क और हेलमेट भी नहीं लगाए थे। एक बाइक पर नियम विरुद्ध दो लोग चल रहे थे। दोनों सिपाहियों ने परिचय देने में भी देर की। मैं और स्टाफ सिपाहियों को नहीं जानता था। फिलहाल, आपस मेें बैठकर मामले को निपटा लिया गया है। - विजय कुमार त्रिवेदी, तहसीलदार।
तहसीलदार सिपाहियों को पहचान नहीं पाए। भूलवश गलती से डंडा लग गया। तहसीलदार ने सॉरी बोल दिया है। अब विवाद निपट गया। - योगेंद्र कुमार, सीओ।
दोनों सिपाही वर्दी में नहीं थे। तहसीलदार को उनके सिपाही होने की जानकारी नहीं थी। बातचीत में तहसीलदार ने सिपाहियों को न पहचानने और उनके परिचय न देने की बात कही। सिपाहियों को अपना परिचय पहले ही देना चाहिए था। - राजेंद्र प्रसाद, एसडीएम