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श्मशान घाट में मोक्ष की आस में तरस रहीं 255 दिवंगतों की अस्थियां

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पीलीभीत। लॉकडाउन की वजह से यातायात पूरी से थमा हुआ है। ऐसे में परलोक सिधारने वालों की अस्थियों का उनके परिजन विसर्जन नहीं कर पा रहे हैं। इसके अलावा मृत्यु के बाद होने वाले अन्य संस्कारों पर भी ग्रहण सा लगा है। हालांकि, इस त्रासदी से जूझ रहे लोगों का कहना है कि दिवंगत हो चुके उनके परिजनों की आत्मा को असल में शांति तब मिलेगी, जब देश से कोरोना का नाश हो जाएगा। कई परिजनों का कहना है कि वह इस संकट की घड़ी में वे देश के साथ खड़े हैं। लॉकडाउन खत्म होने के बाद ही अस्थियों का विसर्जन करेंगे।
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कोरोना वायरस फैलने के बाद पूरे देश में संपूर्ण लॉकडाउन किया गया है। ऐसे में लॉकडाउन से पहले हुई मौत के बाद मृतकों के परिजनों उनकी अस्थियों का विसर्जन नहीं कर पाए हैं। 31 जनवरी से लेकर 20 मार्च तक हुए निधन में लगभग 200 लोगों की अस्थियां श्मशान घाट में विसर्जन के इंतजार में हैं। इतना ही नहीं 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के बाद से 28 अप्रैल तक शहर में करीब 55 मौतें हुई हैं। इनके परिजन भी अस्थियों को विसर्जन के लिए नहीं ले जा सके। दिवंगत लोगों की अस्थियां श्मशान घाट में रखी हुई हैं। इसके अलावा तेरहवीं जैसे अन्य संस्कार भी औपचारिक ही हो पाए। यह सब कुछ केवल इसलिए क्योंकि यह किसी एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि तमाम लोगों को इसका सामना करना पड़ रहा है। दिवंगत की अस्थियों को विसर्जन का इंतजार है। इस समय शवयात्रा में भी बमुश्किल दस-बारह लोगों ही नजर आते हैं। दुख की इस घड़ी में भी लोगों का संकट का सामना करना पड़ रहा है।
17 मार्च को पिताजी 81 वर्षीय माहीधर सेमवाल का देहांत हुआ था। लॉकडाउन होने के बाद उनकी अस्थियों का विसर्जन नहीं कर पाए। एक तरफ दुख भी बहुत है, क्योंकि पिताजी की अस्थियों का विसर्जन नहीं कर पाए लेकिन कोरोना वायरस जैसी आपाद का नाश होना भी पहले जरूरी है। इसलिए अस्थियां विसर्जित करने के लिए कहीं जाने का प्रयास नहीं किया। - रमेश चंद्र सेमवाल, शुगर फैक्ट्री रोड
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16 अप्रैल को माताजी 80 वर्षीय लक्ष्मी देवी का देहांत हुआ था। दाह संस्कार करने के बाद अस्थियों को श्मशान घाट में रखा गया है। अस्थियों को विसर्जन करने के लिए प्रयास किए थे, लेकिन जाने को नहीं मिल पाया। अब शायद लॉकडाउन खत्म होने के बाद ही अस्थियों का विसर्जन कर पाएंगे। - संजीव अग्रवाल, बल्लभनगर कॉलोनी
लॉकडाउन के चलते अस्थियां विर्सजन में जल्दबाजी न करें। दसवां, तेरहवीं समेत अन्य काम निपटाएं, लेकिन लॉकडाउन के नियमों का भी पालन करते रहें। - महंत ओमकार नाथ, परमठ मंदिर
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