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मुद्रा लोन के सताए बैंक नहीं दे रहे फड़ पटरी वालों को लोन

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पीलीभीत। लॉकडाउन में आर्थिक तंगी से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए रेहड़ी और पटरी वालों के लिए पीएम मोदी स्वनिधि योजना से भले ही 10 हजार रुपये का कर्ज देने की घोषणा की गई हो, लेकिन मुद्रा लोन योजना का हश्र देख चुके बैंकों को गरीब दुकानदारों को कर्ज लौटाने का विश्वास नहीं है। इसलिए लोन संबंधी कागज पूरे कराने के नाम पर बैंक उनसे महीनों चक्कर लगवाते हैं। बाद में कोई न कोई पेच फंसाकर उनके फार्म निरस्त कर देते हैं।
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शहर में 10 से 12 हजार फड़ दुकानदार हैं। इनकी लॉकडाउन में तंगी झेलते हुए कमर टूट चुकी है। सड़कों पर फड़ या ठेला लगाकर रोज कमाने- खाने वाले इन दुकानदारों का कहना है कि जो थोड़ी बहुत जमापूंजी थी, वह 70 दिन के लॉकडाउन में खर्च हो गई। अब सिर पर कर्ज तक चढ़ गया है तो वे आगे अपना व्यापार कैसे करें। वहीं बैंक के कुछ अफसरों का कहना है कि बैंक से छोटे लोन लेने के बाद अधिकांश लोग उसे जमा नहीं करते है। इसलिए इनके खाते एनपीए हो जाते है। बैंकों का करोड़ों रुपया डूबा चल रहा है। इसलिए, बैंक लोन किस आधार पर दें। लॉकडाउन के बाद पीएम मोदी ने ऐसे हजारों लाखों दुकानदारों का दर्द समझते हुए उन्हें पीएम स्वनिधि योजना में लोन देने का प्रावधान किया है। इसमें ऐसे दुकानदारों को महज सात प्रतिशत ब्याज पर साल भर के लिए 10 हजार रुपये तक का लोन दिया जाना है, जो फड़ या ठेला लगाकर अपने परिवार की जीविका चलाते हैं। गरीब दुकानदार इस स्कीम से खुश तो हैं लेकिन उन्हें डर भी है। कहीं यह योजना भी मुद्रा लोन योजना की तरह बैंकों की चौखट पर दम न तोड़ दे। सरकार गरीबों के लिए योजनाएं तो बहुत चलाती है, लेकिन उनका लाभ बिचौलियों या चंद लोगों को ही मिल पाता है। मुद्रा योजना में पात्रों को भी लोन न मिलने पर अब इसमें आवेदकों ने लंबे समय से आवेदन ही नहीं किए हैं। इससे यह स्कीम साल भर से ठप है।
लॉकडाउन होने के बाद काम धंधा चौपट हो गया है। सरकार योजनाएं तो बहुत चलाती है, लेकिन बैंक उन पर खरी नहीं उतरतीं। बैंक लोन देने में टालमटोल करती हैं। -सर्वेश कुमार, मोहल्ला देशनगर
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मुद्रा योजना में बेरोजगारों को रोजगार के लिए लोन देने का फैसला सरकार ने लिया था। लेकिन बैंक लोन देने के नाम पर सिर्फ चक्कर कटवाती हैं। लोन तो मिलता नहीं है। -शिवम भारती, मोहल्ला नखासा
बैंकें बेरोजगारों के साथ खिलवाड़ कर रही है। सरकार कहती है कि बेरोजगार को लोन दो, ताकि वे अपना रोजगार कर सके। लेकिन बैंक लोन देने में टालमटोल करते हैं। -हीरा सिंह, चावला चौराहा
सरकार की ओर से संचालित योजनाओं पर काम किया जा रहा है। पात्रों को लोन भी दिया गया है। सभी बैंकों का टारगेट निर्धारित है। अभी तक ऐसी कोई शिकायत नहीं आई है कि बैंक ने लोन देने से मना किया हो। -विनोद कुमार, अग्रणी जिला प्रबंधक
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