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साहब! शिकारियों ने मारा नहीं..तो बिना किसी जानवर से लड़े ही मर गया तेंदुआ

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पीलीभीत। बराही रेंज के जंगल में सुरक्षा खाई में मिले नर तेंदुए के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद भले ही वन विभाग के अफसर आपसी संघर्ष में मौत बता रहे हों, लेकिन मौत के हालात संदिग्ध हैं। कई सवालों के जवाब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में नहीं मिल पाए हैं। जैसे- घटनास्थल के पास आपसी संघर्ष का कोई साक्ष्य विभाग नहीं जुटा सका है। ऐसे में शक शिकारियों पर भी जाता है।
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विशेषज्ञों के मुताबिक, हिंसक वन्यजीव बाघ, तेंदुआ आदि के आपसी संघर्ष में वैसे तो कई तथ्य सामने आते हैं, लेकिन मुख्य रूप से घटनास्थल के पास दोनों वन्यजीवों के पगचिह्न जरूर होते हैं, घटनास्थल से सौ से दौ सौ मीटर के दायरे में संघर्ष के साक्ष्य मिलते हैं। संघर्ष के दौरान वन्यजीव सबसे पहले मुंह पर वार करते हैं। इससे नाक, कान और आंख पर नोचने के निशान और यह अंग लहूलुहान होते हैं। दोनों वन्यजीवों के शरीर के बाल भी घटनास्थल के आसपास मिलते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि यदि आपसी संघर्ष में किसी एक जीव की मौत होती है तो जाहिर कि लड़ाई भीषण हुई होगी। ऐसे में दूसरा जीव भी तो गंभीर रूप से घायल हुआ होगा, लेकिन इस मामले में दूसरा वन्य जीव विभाग ट्रेस नहीं कर पाया है। औपचारिकता निभाने के लिए मामले की जांच एसडीओ उमेश राय को सौंपी गई है।

यह है वन विभाग का दावा
टाइगर रिजर्व के प्रभागीय वनाधिकारी नवीन खंडेलवाल की ओर से जारी प्रेस नोट में कहा गया कि नर तेंदुए के शव का वाह्य परीक्षण पशु चिकित्सक एसके राठौर ने किया, जिसमें प्रथम दृष्टया शव के सभी अंग सुरक्षित मिले। आईवीआरआई के डॉ. करिकलन, डॉ एसके राठौर, डॉ. नूरउलहुदा के पैनल से पोस्टमार्टम कराया गया। जिसमें तेंदुए की गर्दन पर चोट के निशान मिले हैं। मौत का कारण वन्यजीवों में आपसी संघर्ष के कारण गले एवं सांस में रुकावट आना बताया गया है। सैंपल को आईवीआरआई बरेली भेज दिया है। काबिंग करवाई गई, कोई भी अन्य मृत जानवर एक किमी के दायरे में नहीं पाया गया है। केस दर्ज कर लिया गया है।
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यह वन्यजीव संघर्ष नहीं: खान
सेव इंवयरमेंट सोसाइटी के सचिव और पर्यावरणविद डॉ. टीएच खान का कहना है कि तेंदुओं के आपसी संघर्ष की बात की जाए तो एक ही स्थान पर दोनों वन्यजीवों के पगचिह्न मिलते हैं। उनकी लंबाई और वजन में फर्क होता है। संघर्ष के निशान कम से कम सौ से दौ सौ मीटर के दायरे में होते हैं। तेंदुए की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी उसका श्वसनतंत्र बाधित होने की बात कही गई है, ऐसा अमूमन फंदे में गर्दन फंसने पर ही होता है। यह सारे हालात तो यही कह रहे हैं कि तेंदुए की जान इंसानों ने ही ली है।

बराही रेंज के जंगल क्षेत्र में मिले नर तेंदुए की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बाघ या तेंदुए से संघर्ष में मौत की वजह सामने आई है। वन्यजीव के कई दांत भी तेंदुए की गर्दन में लगे मिले है। आपसी संघर्ष के कारण गले और श्वांस में रुकावट होने से तेंदुए की मौत हुई है। बराही रेंजर के नेतृत्व में घटनास्थल से एक किमी जंगल से अंदर व बाहर कांबिंग कराई गई, लेकिन कोई मृत जानवर नहीं पाया गया है।
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- नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, पीलीभीत टाइगर रिजर्व
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