बिना जोखिम के सफारी का आनंद ले सकेंगे पर्यटक
खास बात यह है कि यह सफारी कोर एरिया से दूर होगी। इससे वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर न्यूनतम प्रभाव पड़ेगा और पर्यटक भी बिना जोखिम के सफारी का आनंद ले सकेंगे। वन विभाग का लक्ष्य है कि इस तेंदुआ सफारी को वर्ष के 365 दिन संचालित किया जाए, ताकि पर्यटन को निरंतर बढ़ावा मिल सके। यह पहल पीलीभीत को पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने में सहायक साबित हो सकती है। इस योजना की शुरुआत पूर्व में वन मंत्री अरुण कुमार के निर्देश पर की गई थी। इसके बाद अधिकारियों ने स्थलीय निरीक्षण कर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की। डीएफओ भरत कुमार डीके ने बताया कि प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है और स्वीकृति मिलने के बाद आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
वन्यजीव चिकित्सालय और एनक्लोजर बनाने की भी योजना
तेंदुआ सफारी विकसित कराने के अलावा इस योजना में घायल और रेस्क्यू किए गए तेंदुओं के संरक्षण के लिए भी विशेष व्यवस्था की जा रही है। प्रस्ताव में वन्यजीव चिकित्सालय स्थापित करने और रेस्क्यू एनक्लोजर बनाने की योजना शामिल है, जहां घायल या बीमार तेंदुओं का इलाज और देखभाल की जा सकेगी।