सुबह 10.30 बजे अनिल पोद्दार की 70 वर्षीय मां प्रियबाला पोद्दार कमरे में पड़े तख्त पर पैर नीचे की ओर लटकाकर बैठी पान लगा रही थी। इसी बीच उनके बाएं पैर पर तेंदुए ने पंजा मार दिया। उन्होंने तख्त के नीचे देखा तो होश उड़ गए। तेंदुआ घुसने की बात कहते हुए वह बाहर शोर मचाते हुए भागीं। इस पर परिवार के लोग कमरे की दौड़ पड़े। उनके पुत्र ने बाहर से किवाड़ों में कुंडा लगाकर तेंदुए को कमरे में बंद कर लिया। यह खबर कालोनी में तेजी से फैली तो तमाम लोग घर के बाहर लाठी, डंडे लेकर जमा हो गए। सूचना वन विभाग को दी गई। डीएफओ कैलाश प्रकाश, बरखेड़ा विधायक हेमराज वर्मा, एसपी जेके शाही, व प्रभारी डीएम/एडीएम एके सैनी मौके पर पहुंच गए। सैकड़ों की संख्या में जुटे ग्रामीण तेंदुए पर हमला करना चाहते थे, जिन्हें समझाबुझाकर शांत कराया गया। वन विभाग की टीम ने उसे पकड़ने के लिए दरवाजा खोल पिंजरा लगा दिया और कमरे की खिड़की से शोर मचाकर व पीछे की दीवार पर डंडा मारकर उसे पिंजरे की अंदर करने की कोशिश करने लगे। कई घंटे बाद वह कब्जे आया। ग्रामीणों का कहना है कि तीन दिन से तेंदुआ लगातार कालोनी में देखा जा रहा था। कई बतख व मुर्गियां खा चुका है। ग्रामीणों ने इसकी सूचना भी वन विभाग को दी थी, लेकिन ध्यान नहीं दिया गया।
पहले से घायल था तेंदुआ
पकड़े गए तेंदुए के पीछे का बायां पंजा घायल है। उससे खून रिस रहा था। उसे किस तरह चोट लगी, इस पर वन विभाग और इलाके के लोगों का नजरिया अलग-अलग है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल में कांटा लगाकर तेंदुए के शिकार का प्रयास किया गया मालूम होता है। जबकि डीएफओ का कहना है कि तेंदुए के पंजे में चोट रेलवे लाइन पर ट्रेन की चपेट में आने से लगने का अनुमान है। फिलहाल पशु चिकित्सकों की टीम माला गेस्ट पहुंची और उसका उपचार कर रही है।