जंगरौली में डिप्टी रेंजर सहित चार लोगों को घायल करने वाला तेंदुआ वन विभाग द्वारा बकरा सहित लगाए गए पिंजरे के करीब से होता हुआ देवहा नदी की ओर निकल गया। वनकर्मियों ने सुबह उसके डेढ़ किमी तक पदचिन्ह देखे है। तेंदुए के वापस जाने से वन और पुलिस महकमे को राहत मिली है, लेकिन गांव में उसकी दहशत अभी भी बरकरार है।
न्यूरिया थाना क्षेत्र के गांव जंगरौला आशा एवं सुगनढ़ी थाना क्षेत्र के गांव भिकारीपुर के मध्य खेतों में शनिवार को दोपहर एक तेंदुए ने लोगों पर हमला कर दिया था। इसमें सामाजिक वानिकी के डिप्टी रेंजर अरुण मोहन सहित चार लोग घायल हो गए थे। तेंदुए को पकड़ने के लिए वन विभाग ने शाम को खेत के किनारे पिंजरा लगाकर उसमें बकरा बांधा था। पूरी रात टीम दूर से इसका निरीक्षण करती रही। वनकर्मियों के अनुसार करीब आधी रात को तेंदुआ पिंजरा के पास से गुजरता हुआ खेतों से करीब डेढ़ किमी दूरी पर स्थित देवहा नदी की ओर चला गया। सुबह वनकर्मियों की सूचना पर वनाधिकारी भी मौके पर पहुंचे।
वन विभाग की टीम ने तेंदुए के पदचिन्ह ट्रेस किए। रेंजर वीरपाल सिंह के अनुसार नदी किनारे करीब डेढ़ किमी तक तेंदुए के पदचिन्ह ट्रेस किए गए हैं। उन्होंने बताया कि नर तेंदुआ है, लेकिन इसकी उम्र का आंकलन पदचिन्हों के अध्ययन के बाद ही हो सकेगा। तेंदुए के वापस जाने से वन विभाग और पुलिस ने राहत की सांस ली है, लेकिन ग्रामीणों में इसकी दहशत अभी भी बरकरार है। ग्रामीणों को डर है कि तेंदुआ फिर लौट के न आ जाए।
गांव सहित पूरे क्षेत्र में दिन रही चर्चा
शनिवार को तेंदुए के हमले और रात को उसके वापस जाने की जानकारी होने पर रविवार सुबह भी बड़ी संख्या में लोग खेतों में पहुंचे और वन विभाग की टीम के साथ क्षेत्र में घूमकर स्थिति का जायजा लिया। तेंदुआ वापस जाने के बाद भी पूरे दिन उसकी चर्चाएं होती रहीं। ग्रामीण उसके चले जाने से खुश तो दिख रहे हैं लेकिन वापस आने का डर उनमें अभी भी साफ झलक रहा है।
यह बातों कर रखें ध्यान
-गांव या खेत में तेंदुआ आने पर उसे घेरे नहीं।
- वन एवं पुलिस अधिकारियाें को तुरंत सूचना दें।
- जानवरों को अंधेरे में न बांधे, रोशनी करें।
- खेतों पर जाते समय आग जलाने की व्यवस्था रखें।
- खेतों की ओर अकेले कभी न जाएं।