पूरनपुर। अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर और जन सुनवाई पोर्टल पर शिकायत कर रामलीला मेला का कंट्रोलर बदलवाने की मांग की। उधर, कंट्रोलर ने आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया।
मुख्यमंत्री को भेजे पत्र और जन सुनवाई पोर्टल पर दर्ज शिकायत मेंं कहा गया कि रामलीला मेला के कंट्रोलर तहसीलदार हैं। दूसरे समुदाय के होने के चलते पिछले रामलीला के दौरान निकलने वाली रामबरात में परंपराओं का निर्वहन नहीं किया गया। मेले का आय-व्यय का ब्यौरा नहीं दिया गया। दूसरे समुदाय के लेखपालों को लगाकर अनुचित तरीके से दुकानों, झूलों, खेल तमाशों आदि से भारी रकम लेकर जगह आवंटित की गई थी। आरोप है कि कंट्रोलर की ओर से हिंदू देवी-देवताओं का उपहास उड़ाया गया। शिकायत में कहा गया कि गैर समुदाय के कर्मचारियों के मांसाहार के बाद धार्मिक देवी-देवताओं के स्वरूपों को स्पर्श करने से धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं। शिकायत करने वालों में अधिवक्ता उमाशंकर सक्सेना, धर्मेंद्र सक्सेना, संजीव सक्सेना, विपिन सक्सेना, मनोज वर्मा, उपेंद्र भारती, गिरीश चंद्र सक्सेना शामिल हैं।
उधर, रामलीला मेला कंट्रोलर/ तहसीलदार हबीब उर रहमान अंसारी ने आरोपों को निराधार बताया। कहा कि पदनाम सामान्य होता है। रामलीला मेला का नोडल नायब तहसीलदार ऋषि दीक्षित को बनाया गया है। पिछले साल तो दूसरे तहसीलदार ने रामलीला मेला कराया। उससे पहले उन्होंने मेला कराया था। उनके कार्यकाल में ही रामलीला मेला में 4.34 लाख रुपये की लागत से स्टेज का निर्माण कराया गया। आय-व्यय का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। कोई भी जनसूचना अधिकार के तहत इसकी जानकारी ले सकता है। पिछले साल मेला से पांच लाख की आय हुई। रामलीला मेला के खाते में 12 लाख की धनराशि है।
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