खरुआ में भूमि के बदले एसएसबी से जिन चंद किसानों ने मुआवजे की रकम ली थी, उन्हें एसएसबी के डीआईजी ने हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। यही नहीं जिन किसानों ने मुआवजे की रकम ले ली है, उन्हें एक समारोह में एसएसबी के डीआईजी केपी सिंह ने केंद्रीय कैंटीन और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने संबंधी कार्ड भी प्रदान किए। इसके लिए उन्होंने किसानों को आईकार्ड वितरित किए।
ललौरीखेड़ा के निकट खरूआ में एसएसबी मुख्यालय को करीब आठ साल पहले प्रशासन ने 72 एकड़ जमीन अधिग्रहीत की थी, लेकिन किसान इसके बदले दी जा रही कीमत लेने को तैयार नहीं थे और मामला कोर्ट पहुंच गया, जो आज भी लंबित है। इस बीच समय-समय पर हुए निर्णय के आधार पर एसएसबी ने पिछले दिनों प्रशासन के माध्यम से तत्कालीन सर्किल रेट से चार गुना के हिसाब से किसानों को जमीन की कीमत देनी शुरू कर दी। कुछ किसानों ने तो मुआवजा ले लिया ले लिया लेकिन अधिकांश किसान अभी भी इसे कोर्ट के आदेश के विपरीत बताते हुए मौजूदा सर्किल रेट का चार गुना दाम मांग रहे हैं। किसान नेता बीएम सिंह द्वारा दायर याचिका पर इस मामले की सुनवाई अब 31 मार्च को होनी है। इधर, एसएसबी और प्रशासन के समझाने पर जिन 23 किसानों ने सहमति व्यक्त कर अपनी जमीन का भुगतान ले लिया है उन्हें सोमवार को ललौरीखेड़ा स्थित 26वीं वाहिनी मुख्यालय पर डीआईजी केपी सिंह ने एक सादा समारोह में अन्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए बुलाया। करीब 18 किसान वहां पहुंचे। उन्हें डीआईजी ने कैंटीन सुविधा और मुफ्त इलाज की सुविधा मुहैया कराने के लिए आईकार्ड वितरित किए। इस मौके पर मुआवजे लेने वाले अन्य बचे लोगों के न आने अथवा अभिलेख अधूरे होने पर उन्हें बाद में आईकार्ड दिए जाने की घोषणा की। डीआईजी ने कहा कि कोर्ट के आदेश पर किसानों को जमीन का चार गुना दाम दिया जा रहा है। आगे कोर्ट जो भी आदेश करेगा उसका पालन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस कार्ड के माध्यम से जमीन देने वाले किसान केंद्रीय कैंटीन और एसएसबी अस्पताल की वह सभी सुविधाएं प्राप्त कर सकेंगे जो जवानों के लिए मिलती हैं। कमांडेंट जेपी राना ने कहा कि कुछ और किसानों ने भी धन लेने पर सहमति व्यक्त कर दी है। संचालन सीओ एके जोशी ने किया। इस मौके पर डिप्टी कामंडेंट एसएम मारुती, एएसआई दर्शनलाल सहित कई जवान एवं ग्रामीण मौजूद रहे।
36 लाख रुपये हेक्टेअर मिल रही कीमत
खरूआ की जमीन के बदले किसानों को तत्कालीन सर्किट रेट का चार गुना दाम दिया जा रहा है। जो लगभग 36 लाख रुपये प्रति हेक्टेअर है। इस धनराशि के अलावा 2.76 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से पुनर्वास भत्ता भी दिया जाएगा। कमांडेंट जेपी राना ने बताया कि इस धनराशि के अलावा जमीन अधिग्रहण से अब तक का ब्याज भी दिए जाने की तैयारी की जा रही है।
वक्त पर नहीं मिला पैसा
आठ साल बाद पैसा तो मिल गया है, लेकिन इस आठ साल में हम कितना पीछे हो गए उसकी भरपाई कैसे होगी। विकास में और पीछे न रह जाएं इसलिए जो मिल रहा है फिलहाल वह ले लिया है।
- माखनलाल
बच्चों के भविष्य की चिंता
देर से ही मिला कुछ तो मिला। आठ साल का समय कैसे बिताया हम ही जानते हैं। अब जो भी पैसा मिला है उससे बच्चों का भविष्य बनाने का प्रयास करेंगे।
-छेदालाल