शहर में एक घर अंदर बांसुरी बनाता कारीगार- फाइल फोटो
- फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। मुरलीधर कन्हैया की.. से लेकर फिल्म बलमा में बांसुरिया अब ये ही पुकारे तक संगीत की दुनिया में धूम मचाने वाली बांसुरी की तान संकट के दौर से गुजर रही है। कोरोना वायरस फैलने के बाद लॉकडाउन में बांसुरी बनाने वाले कारीगारों के आगे भुखमारी का संकट पैदा हो गया है। बांसुरी बनाने वाले हजारों हुनरमंद हाथ खाली बैठने को मजबूर हैं।
शहर के मोहल्ला मदीनाशाह, लाल रोड, मोहित्सम खां, बुजकसवान, शरीफ खां चौराहा, बेनी चौधरी और मोहम्मद फारूख में लगभग 50 से ज्यादा परिवार काफी लंबे समय से बांसुरी बनाने का काम करते चले आ रहे है। इनके हाथ की बनी हुई बांसुरी देश से लेकर विदेश तक प्रचलित है। इन कारीगारों से बांसुरी की खरीदने के बाद बड़े कारोबारी बांसुरी को मंहगे दामों पर देश विदेशों में बेचते हैं। लेकिन कोरोना वायरस फैलने के बाद पूरे देश में लॉकडाउन कर दिया गया था। 23 मार्च से शुरु हुए लॉकडाउन के बाद बांसुरी का कारोबार करने वाले लोगों ने माल खरीदना और तैयार करना दोनों हीं बंद कर दिये। ऐसे में बांसुरी बनाने वाले लॉकडाउन के भुखमरी की कगार पर आ चुके हैं। हालात ये हैं कि न तो प्रशासन की तरफ से इनके हालात जानने की कोशिश तक नहीं की जा रही है। न ही कोई समाजसेवी संस्था इन लोगों पर ध्यान दे रही है। बांसुरी कारीगरों के मुताबिक लाखों रुपये का बांसुरी का माल तैयार पड़ा है, लेकिन कोई भी माल उठाने के लिए नहीं आ रहा है। अगर हालात नहीं सुधारे तो परिवार का पालन पोषण करना भी बेहद कष्टकारी पड़ेगा। लॉकडाउन के संकट ने बांसुरी कारीगरों की पूरी तरह से कमर तोड़ दी है।
बांसुरी को कारोबार पूरी तरह से ठप हो चुका है। लॉकडाउन होने से जो माल तैयार पड़ा है उसकी भी डिलीवरी नहीं हो रही है। ऐसे में बहुत सारी परेशानियों का सामान करना पड़ रहा है।
- मोहम्मद अजीम
लॉकडाउन के संकट ने भुखमारी के हालात पैदा कर दिए हैं। हाथों से काम धंधा छिन चुका है। ऐसे में परिवार का पालन पोषण करना बहुत महंगा पड़ेगा।
- फरमान
बांसुरी का कारोबार पहले ही ठप पड़ा था। ऐसे में लॉकडाउन होने से हालात और खराब हो गए है। काम धंधा न होने से पूरा परिवार की कमर तोड़ दी है।
- अहमद नबी
बांसुरी का कारोबार काफी लंबे समय चल रहा है, लेकिन लॉकडाउन से कारोबार मानों खत्म सा हो गया हो। जिन व्यापारियों का आर्डर तैयार है वह भी लॉकडाउन के चक्कर में माल उठाने नहीं आ रहे है।
- इकरार नबी