ओलावृष्टि व बारिश की मार से बेहाल किसानों के साथ प्रशासन भी
खिलवाड़ कर रहा है। गांव में पड़ताल पर जो बात सामने आई है उससे साफ जाहिर
है कि राजस्व कर्मियों ने खेत नहीं ‘मुंह’ देख नुकसान की सूची तैयार की है।
यही वजह है कि गांव के कई बड़े किसानों का नुकसान दर्ज कर उन्हें मुआवजा
भी दे दिया गया, लेकिन तमाम ऐसे छोटे किसानों का सर्वे तक नहीं हो सका।
प्रशासनिक सर्वे के विरोध की यही सबसे बड़ी वजह भी बताई जा रही है।
राजस्वकर्मियों यह हिमाकत उस गांव में करने तक से नहीं चूके हैं जहां डीएम व
नोडल अधिकारी स्वयं जाकर कुछ खेतों में हुए नुकसान का जायजा ले चुके हैं
और यह जिला मंडल का दूसरा सर्वाधिक प्रभावित जिला भी है।
...तो क्या चुनिंदा जगह ही पड़ी ओले की मार
पूरनपुर
तहसील क्षेत्र के सर्वाधिक नुकसान वाले ग्राम मनहरिया खुर्द निवासी मोहन
सिंह की एक एकड़ कृषि भूमि गांव चंदुइया में है। मोहन सिंह के भरे पूरे
परिवार में दो पुत्रों मेें सुच्चा सिंह की कुछ साल पहले मौत हो गई थी।
उसके पत्नी व बच्चों की देख रेख भी उसी के कमजोर कंधों पर है।
दूसरे पुत्र
सतनाम सिंह के दो पुत्र तरसेम सिंह, प्रेम सिंह, पुत्री शीला और लक्ष्मीकौर
है। लक्ष्मीकौर की शादी आठ अप्रैल को तय है। बरिश/ओलावृष्टि ने उसके
अरमानों पर पानी फेर दिया। रही सही कसर प्रशासन ने पूरी कर दी। नुकसान उसकी
भी फसल का उतना ही हुआ जितना गांव के अन्य किसानों का।
एकड़ भर खेत में
चार-पांच बोरा गेहूं निकलना भी मुश्किल है। उसके आसपास के किसानों को
नुकसान पर मुआवजा दिया गया, लेकिन उसका नुकसान न होने की जानकारी दी गई। अब
कर्ज लेकर पौत्री की शादी कर रहा है।
नुकसान पौने चार लाख, मिला नौ हजार
किसान
अजीत सिंह के सभी 12 एकड़ भूमि पर गेहूं की फसल बोई थी। उनके पुत्र
अमृतपाल सिंह और महेंद्र पाल सिंह ने बताया कि बारिश, ओलावृष्टि में चार
एकड़ फसल तो बिल्कुल नष्ट हो गई। जिसे पलट कर साठा धान बो दिया गया। शेष
भूमि पर मात्र दस प्रतिशत फसल ही बची है। उसमे भी सिर्फ भूसा ही हाथ
लगेगा। फसल को बेहतर देख लिमिट से चार लाख रुपये भी बैंक से निकाले थे।
प्रति एकड़ 20-22 क्विंटल गेहूं की फसल की पैदावारी का अनुमान था। सोचा था
पौने चार लाख रुपये का गेहूं हो जाएगा। फसल बर्बाद होने पर मात्र नौ हजार
रुपये मुआवजा का दिया गया।
25 हजार प्रति हेक्टेयर लागत, मिले बस नौ हजार
मनहरिया
खुर्द निवासी परमजीत सिंह ने बताया कि 13 एकड़ कृषि भूमि पर गेहूं की फसल
के लिए लाखों रूपये लिमिट से निकाल खर्च किया। सहकारी समितियों से भी कर्ज
लिया, लेकिन बारिश, ओलावृष्टि ने गेहूं की फसल पूरी तरह बर्बाद कर दी। सात
एकड़ गेहूं की फसल को जोतकर साठा धान लगा दिया। मुआवजा के नाम पर मात्र नौ
हजार रुपये मिले हैं जबकि न्यूनतम 25 हजार रुपये प्रति हेक्टेअर लागत आती
है। राजस्व विभाग की ओर से तो मुआवजा के नाम पर ऊंट के मुंह में जीरा दिया
जा रहा है।
प्रभावितों की संख्या में भी खेल
बुजुर्ग
किसानों की मानें तो तहसील क्षेत्र में करीब 40 हजार से अधिक किसानों की
फसल प्रभावित हुई है, लेकिन प्रशासन पिछले दिनों हुई बारिश, ओलावृष्टि से
मात्र 14409 किसानों के अरमान धुलने की बात कह रहा है। इसमें से 224 गांव
के 5733 किसानों का पचास प्रतिशत से अधिक नुकसान होना राजस्व प्रशासन ने
सर्वे में पाया है।