फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खादी और खाकी के संरक्षण में फल फूल रहा सट्टा

Fri, 22 Jul 2016 11:19 PM IST
पीलीभीत, अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
 खाकी और खादी के संरक्षण में जिले में दिनोंदिन उद्योग की तरह सट्टे का कारोबार पनप रहा है। पुलिस की दिखावे के लिए होने वाली कार्रवाई का ही नतीजा है कि अब सट्टा गांवों में तेजी से पैठ बना रहा है। 
लाटरी बंद हुई तो एक नए व्यापार के रूप में सट्टा सामने आया। दिल्ली, बरेली के एजेंटों से संपर्क साधने के बाद शहर और अब देहात क्षेत्रों में भी दिनोंदिन इस अवैध कारोबार में बढ़ोत्तरी हो रही है। इस पर अंकुश लगाने के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन कार्रवाई बड़े धंधेबाजों के लिए मदद से अधिक नहीं होती। छापामारी तो की ही नहीं जाती। दबाव बनने पर सट्टा लगाने वालों को ही खाईबाड़ बताकर वाहवाही लूटी जाती है। 
विज्ञापन


200 से अधिक खाईबाड़, 15 लाख टर्नओवर 
वर्तमान में बात अगर सट्टा खिलाने वालों की संख्या की करें तो दो सौ से अधिक खाईबाड सक्रिय हैं। टर्नओवर भी चौंकाने वाला है। रोजाना करीब 15 लाख का टर्न ओवर है। कम समय में धनवान बनने की चाहत में लोग धन गंवाने में जुटे हैं और धंधेबाज मोटी कमाई कर रहे हैं। 

यहां फैला है कारोबार 
शहर में खकरा, देशनगर, फीलखाना, मदीनाशाह, नई बस्ती, साहूकारा, आसफजान, शेर मोहम्मद, रेलवे कालोनी, खुदागंज, छोटी मार्केट,  सुनगढ़ी, नौगवां पकडिय़ा आदि दर्जनों इलाके है। इसके अलावा जहानाबाद, बरखेड़ा, माधौटांडा, बिलसंडा, बीसलपुर समेत देहात क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर कारोबार धड़ल्ले से हो रहा है। 

वेबसाइट पर भी है सट्टा 
पुलिस भले ही करोड़ों के खर्च के बाद भी कंप्यूटर पर हाईटेक नहीं हो सकी हो, लेकिन सट्टा माफिया पुलिस से बचने के लिए लगातार हाईटेक हो रहे हैं। पहले पर्ची को बंद कर मोबाइल मेसेज के जरिए कारोबार आगे बढ़ाया और अब वेबसाइट भी चालू हो गई है। 

सीओ चले गए , नहीं हुई धरपकड़ 
थाना स्तर पर पुलिस सटोरियों की मदद करने के लिए अफसरों के आदेशों को भी दरकिनार कर देती है। बता दें कि तत्कालीन सीओ सिटी यशवीर सिंह ने सटोरियों की एक सूची तैयार कराई थी। जिसको सुनगढ़ी, कोतवाली पुलिस को देकर कार्रवाई के निर्देश दिए थेे। तीन-तीन बार रिमाइंडर भी भेजा गया, लेकिन पुलिस ने धरपकड़ तो दूर की बात एक बार दबिश भी नहीं दी। कार्रवाई की आस लिए ही सीओ का जिले से तबादला हो गया। 

बर्चस्व के लिए आए दिन होता है संघर्ष सट्टा सिर्फ लोगों की कमाई ठगने का जरिया नहीं रह गया। इसको लेकर कंपटीशन भी बढ़ा है। आए दिन कारोबारी बर्चस्व को लेकर भिड़ते हैं। असलहों के बल पर होने वाले इन संघर्षों से लॉ एंड आर्डर को भी खतरा बना। पिछले साल कोतवाली क्षेत्र में हुए बहुचर्चित हत्याकांड में तो सट्टे के पीछे ही विवाद की चर्चाएं तेज रहीं।
विज्ञापन


सट्टे के कारोबार को लेकर शिकायतें भी मिली हैं। पुलिस को क्षेत्र के सटोरियों को सूचीवद्ध करने और उनकी गिरफ्तारी करने के निर्देश दिए गए हैं। अवैध कारोबार पर सख्ती से अंकुश लगाया जाएगा। 
- निर्मल विष्ट, सीओ सिटी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें