पीलीभीत। जंगल क्षेत्र से सटी आबादी और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर सांसद और विधायक निधि से लाखों रुपये खर्च कर वन रेजों में तार फेंसिंग कराई गई थी। माननीयों ने अपना हक अदा करते हुए धनराशि तो दे दी, लेकिन इस तार फेंसिंग में करंट आ भी रहा है या नहीं, इसकी उन्होंने जानने की कभी कोशिश नहीं की। तार फेसिंग के नाम पर मात्र तार लगे हुए हैं, उनमें करंट ही नहीं है। ऐसे में वन्यजीव जंगल से बाहर आ रहे हैं और मानव तार को लांघकर जंगलों में घुस रहे हैं।
टाइगर रिजर्व में बढ़ते मानव वन्यजीव संघर्ष को देखते हुए टाइगर रिजर्व प्रशासन ने वर्ष 2017-18 में वन रेंजों में तार फेंसिंग कराने का निर्णय लिया था। इसको लेकर भारी भरकम बजट की जरुरत थी। वजह यह थी कि वन्यजीवों के बढ़ते हमलों से जंगल से सटी आबादी क्षेत्र में दहशत फैल रही थी। आबादी की सुरक्षा के लिए तार फेसिंग को पूरनपुर, बरखेड़ा और बीसलपुर विधायक के अलावा सांसद निधि से बजट दिया गया था। बजट के बाद एक संस्था ने महोफ, माला, हरीपुर, बराही, दियूरिया रेंज में सोलर तार फेंसिंग कराई। सांसद और विधायकों के अलावा प्रोजेक्ट टाइगर, कैंपा योजना समेत अन्य मदों से मिली धनराशि से सभी पांच रेंजों में करीब 40 किलोमीटर की तार फेंसिंग कराई गई। कुछ माह तक चलने के बाद इस तार फेंसिंग में करंट प्रवाहित होना ही बंद हो गया। इससे अब न तो वन्य जीव ही सुरक्षित है और न ही जंगल से सटी आबादी। अब इस ठप पड़ी तार फेंसिंग को लांघकर वन्यजीव आबादी में और मानव जंगलों की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसे में किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता है।
कुछ वन रेंजों में बैटरी में खराबी होने और तार डैमेज होने से करंट प्रवाहित नहीं हो रहा है। इसकी जांच भी कराई गई थी। तार फेंसिंग को दुरुस्त कर शीघ्र ही इसमें करंट प्रवाहित किया जाएगा। -नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, टाइगर रिजर्व
बरखेड़ा के विधायक किशनलाल राजपूत ने बताया कि विधायक निधि से टाइगर रिजर्व में सोलर तार फेंसिंग कराने को धनराशि दी गई थी। अब यह तार फेंसिंग कार्य कर रही है या नहीं, पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के उच्चाधिकारियों से वह जानकारी लेंगे। यदि इसमें कमी है तो तत्काल इसे दुरुस्त कराया जाएगा।