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बंदी के लिए नहीं महंगाई की मार

Thu, 22 Jan 2015 11:33 PM IST
पीलीभीत।
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 महंगाई चाहे कितनी ही क्यों न बढ़ गई हो, लेकिन थाने के बंदियों पर महंगाई की मार नहीं दिखती। दशकों से उनके लिए चाय-नाश्ते आदि का 10 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से निर्धारित हैं। यह अलग बात है कि बंदी को अधिकांश तौर पर उसके घर वाले ही चाय नाश्ता करा देते हैं, लेकिन थाने के मुंशी निर्धारित बंदी खुराक का बिल बना रकम दिए आहरण कर लेते हैं। पिछले साल 50,600 रुपये खुराकी का आहरण थाने के मुंशी कर चुके हैं।
शासन ने थानों की हवालात में रखे जाने वाले हवालाती बंदियों के लिए दशकों से पांच रुपये खुराकी निर्धारित की थी। इस महंगाई के दौर में पांच से 10 रुपये तक एक चाय मिलती है। तीन साल पहले इसे बढ़ाकर पांच रुपये किर दिया गया। अक्सर थानों पर आने वाले हवालाती बंदियों को चाय-नाश्ता व खाना उसके घर वाले उपलब्ध कराते हैं। शासन से मिलने वाली खुराकी का लाभ हवालाती बंदी को तो नहीं मिल पाता। लेकिन थाने के मुंशी खुराकी चिक में खेल बंदियों की खुराकी से अपनी जेब भरने से कोई परेहज नहीं करते हैं। पिछले साल पुलिस रिकार्ड पर नजर डाले तो विभाग ने जिले भर के थानों से भेजी गई खुराकी चिक पर करीब 50 हजार, 600 रुपये का धन आहरण किया है। खासबात यह है कि पिछले छह माह से सुनगढ़ी, उत्तरी सेहरामऊ, न्यूरिया सहित कई थानों से खुराकी चिक पुलिस विभाग के आंकिक कार्यालय में उपलब्ध नहीं कराई गई है।
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ऐसे होता है भुगतान
थाने पर हवालाती बंदियों की खुराकी चिक होती है। इस चिक के निर्धारित प्रपत्र को भरकर मुंशी आंकिक कार्यालय भेजता है। आंकिक विभाग एसपी की स्वीकृत के बाद धन थाने को भेज देता है।
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हवालाती बंदी की खुराकी सिर्फ 10 रुपये निर्धारित है। जो काफी कम है। वैसे तो बंदी के परिवार वाले ही अक्सर खाना व चाय-नाश्ता उपलब्ध करा देते हैं। जिनके घरों से खाना आदि नहीं आता है। उन्हें पुलिस बंदी मेस से खाना खिलाती है।
सोनिया सिंह, एसपी
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