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Pilibhit News: इलाज में बदइंतजामी, 4 माह में थमी 44 बच्चों के जीवन की सांसें

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जिला अस्पताल का पीकू वार्ड। संवाद - फोटो : Samvad
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पीलीभीत। निशुल्क इलाज की आस में बड़ी संख्या में लोग अपने नवजात शिशुओं को लेकर जिला अस्पताल के एसएनसीयू (विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई) में पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें क्या मालूम, जहां वे अपने शिशु को जीवन मिलने की आस में लेकर पहुंचे हैं, वहां बदइंतजामी हावी हैं। विशेषज्ञ डॉक्टर न होने सहित अन्य कई कारणों की वजह से नवजातों की मौत हो रही है। आंकड़ों की मानें तो पिछले चार माह में भर्ती किए गए 303 में से 44 बच्चों ने दम तोड़ दिया।
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जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में 28 जनवरी को एक नवजात बच्चे के एक्सपायर टीका लगने से मौत हो गई थी। आए दिन एसएनसीयू के बाहर बच्चों की मौत पर परिजन हंगामा करते देखे गए। शुक्रवार की देर शाम भी दो भर्ती बच्चों की मौत से शोर मच गया। हालांकि एसएनसीयू में बच्चों की मौत होना कोई नई बात नहीं है। अस्पताल से मिले आंकड़ों के अनुसार आर्थिक तंगी में परेशान लोगोें ने निशुल्क इलाज की आस में जनवरी में 59 शिशु, फरवरी में 109 शिशु, मार्च में 79 शिशु व अप्रैल में 56 शिशु भर्ती कराए थे। कई बच्चे प्राइवेट अस्पताल तो कई महिला अस्पताल में जन्म के बाद इलाज के लिए गंभीर स्थिति में सीपैप, मशीन, फोटोथेरेपी के लिए लाए गए थे। एसएनसीयू के आंकड़ों की मानें तो भर्ती किए गए 303 बच्चों में से 44 बच्चों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। मौत का यह आंकड़ा पिछले चार माह में 14 प्रतिशत रहा। इसमें कई बार बच्चों के परिजनों ने जमकर हंगामा भी काटा है। पीकू वार्ड में भी अधूरे इंतजाम
जिला महिला अस्पताल के पीकू वार्ड जिसे बच्चों का आईसीयू भी कहा जाता है। वहां हमेशा ही अधूरे इंतजाम दिखे हैं। वर्तमान में पीकू वार्ड में नौ में से दो ही पर वेंटिलेटर व मॉनीटर की सुविधा है, जबकि आए दिन डायरिया, निमोनिया से पीड़ित बच्चों को भर्ती किए जाते हैं। वहीं, संक्रमण से बचने के लिए जहां तीमारदारों को लेकर सावधानी बरतनी होती है। वहीं, जिला महिला अस्पताल के पीकू वार्ड में हमेशा ही आवाजाही बनी रहती है। हालांकि मरीज बच्चे के साथ खुद तीमारदार भी बिस्तर पर दिखते हैं, इससे भी अव्यवस्था फैलती है। संवाद
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