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गलत तरीके से जोड़ दिए 104 मतदाताओं के नाम

Wed, 26 Aug 2015 11:27 PM IST
माधोटांडा/पीलीभीत।
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चुनाव लड़ने को लोग कोई भी पैतरा चलने से नहीं चूक रहे। बार्डर क्षेत्र के गांव बूंदीभूड़ में 104 नाम गलत तरीके से शामिल करने का मामला प्रकाश में आया है। गांव से बीएलओ द्वारा सूची भेजे जाने के बाद नाम शामिल किए जाने की शिकायत पर एडीएम ने जांच के आदेश दिए हैं।
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पंचायत चुनाव की तैयारियों के चलते इन दिनों मतदाता पुनरीक्षण का कार्य चल रहा है। पिछले दिनों अनंतिम सूची जारी होने के बाद दावे आपत्तियां मांगी गई थी। इस दावा आपत्तियों के दौरान पूरनपुर तहसील के बार्डर क्षेत्र के गांव बूंदीभूड़ के ग्रामीणों ने पहले एसडीएम से शिकायत की और समस्या का हल न होने पर एडीएम से शिकायत की है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव की मतदाता सूची में पड़ोस के गांव नौजल्हा से बाढ़ में विस्थापित होकर आकर लगभग एक साल से शरण लिए लोगों के नाम शामिल कर दिए गए हैं, वह भी बीएलओ द्वारा सूची ब्लाक भेजने के बाद।
आरोप है कि अलग से जोड़े गए 104 लोगों की सूची पर बीएलओ के फर्जी हस्ताक्षर हैं। बीएलओ द्वारा भी इन नामों की सूची न भेजने की पुष्टि होने पर एडीएम ने इसे गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। जांच के आदेश होने पर अपने को फंसता देख संबंधित ब्लाक और तहसील कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। बुधवार को गांव पहुंचकर ग्रामीणों ने इसकी जानकारी की। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जिस जमीन पर विस्थापित लोग रह रहे हैं वह वनविभाग की और अवैध रूप से काबिज होने के कारण वन विभाग ने इनमें से 38 लोगों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज करा रखा है।
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मामले की जानकारी हुई है। जांच कराई जा रही है। जिन 104 लोगों के नाम शामिल किया जाना बताया जा रहा है उनके नाम पहले किस गांव में थे, यह देखा जा रहा है। जांच में यदि गड़बड़ी मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी। पहली प्राथमिक मतदाता सूची में सही लोगों के नाम शामिल कराने की है।
मासूम अली सरवर, डीएम
आसान नहीं होगा चुनाव ड्यूटी कटवाना
पीलीभीत। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में इस बार ड्यूटी कटवाना आसान नहीं होगा। चुनाव आयोग के निर्देश पर विभागाध्यक्षों को नोडल अधिकारी बनाया गया है। यह अधिकारी लॉगिन पासवर्ड के माध्यम से अपने स्टाफ के नाम और पदनाम सहित सूची स्वयं कंप्यूटर में ऑनलाइन फीड कराएंगे। इसके लिए विभाग के जिम्मेदार अफसरों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
पंचायत चुनाव में ड्यूटी लगाने के लिए अब तक विभागों से सूची मंगवाकर उसे चुनाव कार्यालय के माध्यम से कंप्यूटर में फीड कराया जाता था। इसमें जुगाड़ कर कई कर्मचारी का नाम विभाग से चुनाव कार्यालय को भेजा ही नहीं जाता था। वहीं कई अधिकारी-कर्मचारी बाद में नाम कटवा लेते थे, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। राज्य चुनाव आयोग ने इस पर अंकुश लगाने को इसकी जिम्मेदारी विभागाध्यक्षों पर डाल दी है।
प्रत्येक विभाग के जिम्मेदार अफसर को अपने विभाग का नोडल अधिकारी बनाकर लॉगिन पासवार्ड जारी किया गया है। इसके माध्यम से उन्हें अपने स्टाफ के नाम आयोग की वेबसाइट पर फीड कराने होंगे। सभी अधिकारी कर्मचारियों की पदनाम सहित सूची फीड होने के बाद आयोग के साफ्टवेयर के माध्यम से ही चुनाव में ड्यूटी लगेगी।
इसके लिए नोडल बनाए गए विभागाध्यक्षों को एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है। एनआईसी के माध्यम से दिए गए इस प्रशिक्षण में सभी नोडल अधिकारियों को साफ्टवेयर में नाम दर्ज करने की जानकारी गई है। उप जिला निर्वाचन अधिकारी/एडीएम अजयकांत सैनी ने बताया चुनाव में ड्यूटी लगाने को नोडल अधिकारी नियुक्त कर दिए गए हैं। कुछ नोडल अधिकारियों का प्रशिक्षण शेष रह गया है जिन्हें जल्द प्रशिक्षित कराया जाएगा।
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