पीलीभीत के जंगलों को टाइगर रिजर्व घोषित हुए आज दो साल पूरे हो गए। इन दो सालों में पर्यटकों की संख्या में काफी बढ़ोत्तरी हुई है, जिससे गत वर्ष की अपेक्षा आमदनी भी करीब दोगुनी हो गई है। बावजूद इसके पर्यटकों की सुविधाओं के नाम पर कोई विशेष बदलाव नहीं हुआ है।
जिले के 72 हजार हेक्टेअर में फैले जंगलों को शासन ने नौ जून 2014 को टाइगर रिजर्व घोषित किया था। टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद यहां पर्यटन की संभावनाएं बढ़ी थीं, साथ ही पर्यटकों की सुविधा के लिए जंगल और इसके बाहर तमाम कार्य होने की उम्मीद जगी थी, लेकिन दो वर्षों में टाइगर रिजर्व में हुए कार्य और सुविधाओं को देखा जाए तो कोई विशेष उल्लेखनीय कार्य अब तक नहीं हुए हैं। जो भी व्यवस्थाएं आज टाइगर रिजर्व में चूका स्पाट एवं अन्य स्थानों पर दिखाई दे रही हैं वह सब पूर्व की योजनाओं का परिणाम हैं। इन दो सालों में पर्यटक स्थलों का विकास तो दूर स्टाफ की कमी तक पूरी नहीं हुई। बजट के अभाव संविदा पर रखे गए वाचरों को भी निकाल दिया गया। वहीं पर्यटकों की संख्या एवं आमदनी की बात करें तो इसमें काफी इजाफा हुआ है। इस वर्ष 15 नवंबर 2015 से 31 मई 2016 तक 15 हजार से अधिक पर्यटक टाइगर रिजर्व एवं इसमें बने चूका स्पॉट व अन्य स्थानों पर पहुंचे है। पर्यटकों के इस आमद से टाइगर रिजर्व को 28 लाख रुपये की आमदनी हुई है, जबकि गत वर्ष पर्यटकों से मात्र 17 लाख का आमदनी हुई थी।
नहीं हुई एफडी की तैनाती
टाइगर रिजर्व बनने के बाद यहां एफडी (फील्ड डायरेक्टर) की तैनाती होनी चाहिए थी, लेकिन एफडी तो दूर दो वर्षों में आईएफएस डीएफओ भी तैनात नहीं हो सके हैं। वहीं दो के स्थान पर मात्र एक एसडीओ ही तैनात हैं। वनदरोगा, वनरक्षक एवं वाचरों की संख्या भी पूरी नहीं है।
ठहरने और घूमने की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं
टाइगर रिजर्व आने वाले पर्यटकों को जंगल में घूमने के लिए निजी वाहनों का प्रयोग करना पड़ता है जबकि चूका एवं अन्य वन्यजीव उद्यानों में जिप्सी अथवा अन्य वाहनों की व्यवस्था रहती है। इसके साथ ही पर्यटकों के ठहरने के लिए पूर्व में बने छह हट और मुस्तफाबाद, बराही, महोफ व माला के गेस्ट हाउस ही हैं जो सीजन में अक्सर हाउसफुल रहते हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो हाउसफुल होने के कारण इस बार काफी संख्या में पर्यटकों को मायूस लौटना पड़ा।
चूका के अलावा भी स्थान हो चिन्हित
टाइगर रिजर्व बनने से काफी पहले चूका स्पॉट को इको टूरिज्म के रूप में तैयार किया गया था लेकिन अब यहां भी पक्के भवन बनने से इसकी प्रकृतिक सुंदर कम हो रही है। जंगल में कुछ और स्थान चिंहित कर रात्रि निवास के हिसाब से व्यवस्थाएं कराई जानी चाहिए।
वर्षगांठ पर कार्यक्रम आज
टाइगर रिजर्व की दूसरी वर्ष गांठ पर आज प्रभागीय वनाधिकारी कार्यालय में कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। सुबह 10 बजे से होने वाले इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डीएम मासूम अली सरवर करेंगे, जबकि वन संरक्षक विशिष्ट अतिथि होंगे।
टाइगर रिजर्व के विकास के लिए क ई योजनाएं तैयार कर शासन को भेजी गई हैं। इनको स्वीकृति मिलने पर और बेहतर व्यवस्थाएं कराई जाएंगी।
- कैलाश प्रकाश, डीएफओ