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Pilibhit News: नकली खाद पकड़ने के मामले में कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूरी

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पीलीभीत। खाद की किल्लत की आड़ में कालाबाजारी कर रहे धंधेबाजों पर कृषि विभाग मेहरबान हैं। एक माह में नकली खाद के तीन मामले सामने आने पर एफआईआर तो दर्ज करा दी गई, लेकिन उससे आगे की कार्रवाई करने के बजाय अफसर चुप्पी साध गए। ऐसे में धंधेबाजों और जिम्मेदारों से गठजोड़ के भी आरोप लगने लगे हैं।
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जिले के एक बड़े दायरे में खेती की जाती हैं। यहां रबी और खरीफ की अधिकांश फसलों को उगाया जाता है। इस समय गेहूं और गन्ने की बोआई का कार्य जोरो पर हैं। जिसके चलते खाद और कीटनाशक की डिमांड बढ़ गई है। किसानों को डीएपी समेत अन्य खाद की जरूरत बढ़ गई है। इसके लिए समितियों पर लंबी कतार भी लग रही है। वहीं प्राइवेट स्तर पर भी किसान अधिक पहुंच रहे हैं।
विभाग की ओर से समितियों पर पर्याप्त खाद उपलब्ध होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन किसानों का कहना है कि खाद न मिलने से वे परेशान हैं। जिसके चलते विरोध प्रदर्शन तक की नौबत आ गई है। इधर खाद की किल्लत की आड़ में दुकानों पर नकली खाद का खेल भी बढ़ गया है।
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विभाग की सख्ती के बीच एक माह पूर्व से जिले में तीन मामले सामने आए। जिसमें नकली खाद पकड़ी गई। इन मामलों में विभाग कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति तक सीमित है। विरोध के बाद एफआईआर दर्ज कराकर चुप्पी साध ली गई है।


कार्रवाई में शिथिलता से धंधेबाजों के हौसले बुलंद
नकली खाद का मामला सामने आने पर विभाग की ओर से एफआईआर दर्ज कराकर चुप्पी साध ली जा रही है। किसानों का कहना है कि विभाग की संलिप्तता के चलते ही नकली खाद का खेल जोर पकड़ रहा है। जबकि नकली खाद पकड़े जाने के बाद संबंधित दुकानदार का लाइसेंस निलंबित किया जाना चाहिए। किसान नेता मंजीत सिंह का कहना है कि अफसर किसानों के प्रति लापरवाह रवैया अपनाए हैं। इसको लेकर शासन स्तर पर भी पत्राचार किया जाएगा।


छापा मारने से पहले ही बंद हो जाती हैं दुकानें
जिले में कृषि विभाग की सख्ती किसी से छिपी नहीं हैं। शासन की सख्ती के बाद दुकानों पर कालाबाजारी पकड़ने के लिए छापा मार कार्रवाई तो की जाती है, लेकिन कार्यालय से निकलने से पहले ही दुकानों को टीम के आने का पता चल जाता है। जिसके चलते अफसरों को अधिकांश दुकानें बंद मिलती हैं। एक- दो दुकानों पर कार्रवाई के नाम पर औपचारिकता निभाकर अफसर लौट जाते हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है।
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