पीलीभीत। डीआईओएस कार्यालय से जुड़े 3.87 करोड़ के घोटाले के मामले की जांच तेज हो गई है। पुलिस ने आरोपी चपरासी इलहाम शम्सी को कोतवाली बुलाकर उसके बयान दर्ज किए। साथ ही उससे 50 से अधिक सवाल पूछे गए। एएसपी विक्रम दहिया और सीओ सिटी दीपक चतुर्वेदी ने भी कोतवाली पहुंचकर आरोपी से पूछताछ की और विवेचना की प्रगति जानी।
जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से जुड़े सरकारी धन के घोटाले में पुलिस ने जांच तेज कर कर दी है। विवेचक इंस्पेक्टर क्राइम सतीश कुमार ने शुक्रवार को मुख्य आरोपी लिपिक इलहाम शम्सी को कोतवाली बुलाया। पूछताछ के दौरान आरोपी से घोटाले से जुड़े 50 से अधिक सवाल पूछे गए और कई महत्वपूर्ण तथ्यों को संकलित किया गया। एएसपी विक्रम दहिया और सीओ सिटी दीपक चतुर्वेदी भी कोतवाली पहुंचे।
दोनों अधिकारियों ने आरोपी से सीधे सवाल-जवाब कर बैंकिंग लेनदेन, फ्रीज खातों और निवेश से जुड़े पहलुओं पर जानकारी ली। साथ ही विवेचक से अब तक की जांच प्रगति की विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी। इस मामले में पुलिस अब तक आरोपी और उसके रिश्तेदारों के 38 बैंक खातों में जमा 3 करोड़ 87 लाख 2 हजार 568 रुपये की धनराशि फ्रीज कर चुकी है।
जांच में सामने आया है कि बीसलपुर स्थित एक इंटर कॉलेज में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नियमों की अनदेखी करते हुए डीआईओएस कार्यालय से संबद्ध था। उसने विभागीय मिलीभगत से सरकारी धन को अपनी पत्नी अर्शी खातून, साले और अन्य परिचितों के खातों में ट्रांसफर किया। गौरतलब है कि डीएम के निर्देश पर 13 फरवरी 2026 को कोतवाली में इस मामले में एक करोड़ रुपये से अधिक के गबन की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इस मामले में मुख्य आरोपी को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिली हुई है। एसपी सुकीर्ति माधव ने बताया कि मामले में विस्तृत जांच की जा रही है। संवाद