पीलीभीत। डीआईओएस कार्यालय के बहुचर्चित घोटाले की जड़ें काफी गहरी हैं। चपरासी इल्हाम शम्सी ने करोड़ों की जिस सरकारी धनराशि को ठिकाने लगाया, उसमें डीआईओएस के अलावा कोषागार के जिम्मेदारों की भूमिका भी अहम रही। खुलासे के बाद मिले संदिग्ध खातों में कई ऐसे खाते सामने आए, जिनके एक ही खाते पर आईएफसी कोड और खाता नंबर अलग-अलग पाया गया। डीआईओएस कार्यालय से भेजे गए बिलों पर कोषागार के बिल वेतन बाबू बिना जांच उसे पास कर धनराशि को ठिकाने लगवाते रहे। कोषाधिकारी भी इसपर अपनी स्वीकृति देते रहे।
जिले में पिछले माह डीआईओएस कार्यालय से संबद्ध चपरासी से बाबू बने इल्हाम शम्सी के करोड़ों के घोटाले का खुलासा हुआ था। अपनी पत्नी अर्शी खातून के खाते में करोड़ों की सरकारी धनराशि भेजने की शिकायत पर पूरा मामला खुला था। डीएम ज्ञानेंद्र सिंह ने मामले को गंभीरता से लेकर जांच शुरू कराई तो एक के बाद एक करीब 35 ऐसे खाते सामने आए, जिसमें करोड़ों रुपये की सरकारी धनराशि का लेनदेन किया गया।
इसमें इल्हाम शम्सी के करीब करीबी महिला व अन्य शामिल हैं। यह भी सामने आया कि वर्ष 2018 से रुपये ठिकाने लगाने का खेल चल रहा था। इसके बाद इल्हाम शम्सी को निलंबित किया और उसके व उसकी पत्नी पर रिपोर्ट दर्ज की गई। दो दिन पूर्व डीआईओएस कार्यालय के एक बाबू विमल कुमार को भी निलंबित किया गया।
इधर सामने आया कि जिन 35 खातों में धनराशि का लेनदेन किया गया, उसमें कई चौकाने वाले खुलासे हुए। कई खाते ऐसे सामने आई। इसमें आईएफसी कोर्ड और खाता नंबर अलग-अलग होने के बाद ही धनराशि को ट्रांसफर किया जाता रहा। हालांकि इन खातों को फ्रीज कर जांच की जा रही है।
डीआईओएस कार्यालय की बेनेफीशियरी पर आंखें बंद कर किया गया ट्रांजेक्शन
इल्हाम शम्सी ने अलग-अलग आईएफसी कोड और खाता नंबर की बेनेफीशियरी (लाभार्थी या हितग्राही) को तैयार किया। विभागीय बाबू और डीआईओएस से उसे स्वीकृत कराकर कोषागार भेजी गई। कोषागार में भी वेतन बिल बाबू ने संबंधित बेनेफीशियरी को पोर्टल में जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की और उसे पास कर कोषाधिकारी की स्वीकृति के बाद धनराशि को अंजान खातों में भेजते रहे। यह सिलसिला वर्ष 2018 से जारी है।
कोषागार के वेतन बिल बाबू बाउचर बनाकर कराते धनराशि को करते रहे ट्रांसफर
कोषागार में आने वाले भुगतान बिल से संबंधित अभिलेखों की वेतन बिल बाबू अपने पोर्टल से जांच करते हैं। आईएफसी कोड, खाता नंबर का मिलान करने के बाद संबंधित बिल का बाउचर बनाया जाता है। इसके बाद कोषाधिकारी की संस्तुति के बाद धनराशि को संबंधित खातों में भेज दी जाती है। करोड़ों के घोटाले में बिना जांच और मिलान के ही वेतन बिल बाबू और कोषाधिकारी करोड़ों की धनराशि को ठिकाने लगाते रहे।
इल्हाम ने करोड़ों से खुद और रिश्तेदारों की बनाई लग्जरी लाइफ
इल्हाम शम्सी ने करोड़ों रुपये की धनराशि को ठिकाने लगाने के बाद खुद के साथ अपने करीबी रिश्तेदारों की लाइफ को लग्जरी करने पर जोर दिया। रियल स्टेट पर पैसा लगाने के साथ ही अन्य महंगे-महंगे शौक पूरे किए। यह भी बात सामने आई है कि उसने बरेली में रियल स्टेट में अच्छा खासा रुपये खपाया। इसके अलावा कई अन्य प्रमुख इलाकों में भी रियल स्टेट में उसका रुपये लगा होने की बात सामने आ रही है।