संस्कार भारती के तत्वावधान में हुई काव्य संध्या में कवियों ने एक से बढ़कर एक रचनाएं प्रस्तुत की। कवियों को सुनने के लिए श्रोताओं की खासी भीड़ जुटी।
दीपावली के उपलक्ष्य में शहर की बल्लभनगर कालोनी में बृहस्पतिवार देर शाम हुई काव्य संध्या का शुभारंभ डॉ. देशबंधु मिश्रा तन्हा ने वाणी वंदना से किया। कवि शारमेंद्र मिश्र ने अपनी रचना पढ़ी -
इजाफा मोहब्बत का हो जाए तो दीवाली मनाई जाए
दीप खुशियों के जल जाएं तो दीवाली मनाई जाए।
देवेंद्र वर्मा ने अपनी कविता सुनाई -
भइया भइया कह चलती रही, बनकर के तू परछाई
बचपन की याद आई तो, मेरी आंखें भर आईं।
प्रेमसागर शर्मा ने कहा -
इस दीवाली दीप ऐसे जलाओ, हर घर हर मन हो उजियारा
कोई घर न बचे कोई मन न बचे, न छूटे कहीं अंधियारा।
योगेंद्र गोस्वामी नीरव ने बचपन की यादें ताजा करते हुए कहा -
खील बताशा लड्डू बरफी कतली काजू वाली थी
बचपन की हर एक दिवाली मस्ती भरी दिवाली थी।
डॉ. देवेंद्र गोस्वामी ने मौजूदा हालातों पर अपनी पंक्तियां पढ़ी
मोदी जी अब बहुत हो चुका कब तक यह अंधेर चलेगा
महंगाई जो जख्म दे रही, उनको आखिर कौन भरेगा।
अच्छे दिन अब नहीं चाहिए, रोटी दाल मगर मत छीनो
रोटी बस भरपेट मिले, तो बुरा वक्त भी नहीं चलेगा।
इसके अलावा अरुण भारद्वाज मस्त, डॉ. जयदेव शर्मा, जीएस मोहन, अविनाश चंद्र मिश्रा, रमेश चंद्र शर्मा, प्रदीप अग्रवाल अंकुर आदि ने भी काव्य पाठक किया। अध्यक्षता रमेशचंद्र त्रिवेदी पुष्प ने की। इस मौके पर राजीव वर्मा, स्मिता बंसल, अशोक वाजपेई, दीपक सक्सेना, आरती गुप्ता, तुषार अग्रवाल, रमाकांत शर्मा, नीतू सक्सेना, आशादेवी शर्मा, अभिषेक अवस्थी, द्वारिका प्रसाद, प्रतिभा पांडेय आदि मौजूद रहे।