जिले में मानव तस्करी यूनिट की स्थापना वर्ष 2012 में पुलिस लाइन स्थित एक भवन में अस्थायी रूप से की गई। इसके लिए स्टाफ और संसाधन भी उपलब्ध कराए गए, लेकिन यूनिट स्थापना से लेकर आज तक यहां एक भी मामला दर्ज नहीं हो सका है। या यूं कहें कि यूनिट का सभी स्टाफ बैठे-बैठे वेतन पा रहा है। चार साल में महज एक महिला को बेचे जाने के मामले की जांच यूनिट को जरुर मिली। जिसकी विवेचना कर आरोप पत्र अदालत में दाखिल हो चुका है। वर्तमान समय में कोई विवेचना भी नहीं है।
यूनिट के यह हैं काम
जिले में लगे भट्टाें पर यूनिट को लगातार नजर रखनी होती है ताकि किसी भट्टे पर बाल श्रमिक काम करता मिलता है तो यूनिट भट्टा मालिक के खिलाफ कार्रवाई करेगी। साथ ही बाल श्रमिकों को छुड़ाकर उनके परिवार के पास पहुंचाएगी। इसके अलावा होटल और ढाबों पर बाल श्रमिकों को मुक्त कराने व मानव तस्करी पर नजर रखनी होती है। अगर किसी महिला या किशोरी से उसकी मर्जी के अनुरूप वेश्यावृत्ति कराई जा रही है तो यूनिट को वेश्यावृत्ति कराने वाले के खिलाफ भी कार्रवाई करनी होगी।
यूनिट को मिली गाड़ी चला रहे है अधिकारी
शासन की तरफ से यूनिट को जीप एलाट की गई है। जिसका उपयोग यूनिट की टीम को छापमारी करने के लिए करना है, लेकिन यूनिट को मिली गाड़ी पर पुलिस के अधिकारियों ने कब्जा कर रखा है। जिसके चलते सिर्फ कागजों में चेकिंग अभियान चलाकर यूनिट खानापूर्ति कर लेती है।
यह तैनात है स्टॉफ
पद नाम पदों कीं संख्या, उपलब्ता रिक्त
निरीक्षक 01 01 -
एसआई 02 - 02
मुख्य आरक्षी 02 02 02
आरक्षी पुरुष 02 02 -
आरक्षी महिला 01 01 -
00
पीड़ित यूनिट में आकर अपनी रिपोर्ट दर्ज नहीं कराते हैं। इस वजह से अभी तक कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है। यूनिट में तैनात रहे अधिकतर प्रभारियों ने भी खास दिलचस्पी नहीं ली है, लेकिन अब यूनिट के कार्य पर निगरानी रखी जाएगी। छापामारी करके बाल श्रम को रोका जाएगा। जरूरत पड़ने पर यूनिट को गाड़ी उपलब्ध हो जाती है।
- सुधीर कुमार सिंह, एएसपी