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अब स्टेशन मास्टर को घेरने में जुटी पुलिस

Wed, 22 Apr 2015 11:34 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला पीलीभीत
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अब उसे अभिलेख में दर्ज करने के साथ दरोगा सिद्धार्थ गोस्वामी की ओर से जीडी में एक तस्करा दर्ज किया गया है। इसमें स्टेशन मास्टर पर ही पुलिस कर्मियों से अभद्रता और हाथापाई करने का आरोप लगाया गया है। सूत्र बताते हैं कि ऐसा पुलिस ने इस लिए किया है ताकि मौका पड़ने पर वह स्टेशन मास्टर के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कर समझौते का दबाव बना सके।
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दूसरी ओर कोतवाली पुलिस द्वारा स्टेशन मास्टर राजीव कुमार श्रीवास्तव अज्ञैर पंप आपरेटर चुन्नीलाल को स्टेशन पर दौड़ा-दौड़ा कर पीटने की दर्ज रिपोर्ट के मामले की जांच जीआरपी और आरपीएफ ने शुरू कर दी है। जीआरपी एसओ राघवेंद्र सिंह ने रेलवे स्टेशन पहुंचकर घटना स्थल का निरीक्षण कर पोटर कुमार शेखर, पंप आपरेटर चुन्नी लाल के बयान लिए। स्टेशन अधीक्षक कैसर इमाम से भी घटना की जानकारी ली। वहीं आरपीएफ के एक उप निरीक्षक ने स्टेशन पहुंचकर स्टेशन अधीक्षक और जीआरपी चौकी इंचार्ज से घटना की जानकारी ली।

ड्यूटी पर नहीं आए स्टेशन मास्टर
पूरनपुर। घटना के दूसरे दिन मंगलवार को भी स्टेशन मास्टर राजीव श्रीवास्तव की शाम चार बजे से रात बारह बजे तक ड्यूटी थी। राजीव के ड्यूटी पर न आने से स्टेशन अधीक्षक कैसर इमाम और ब्रजमोहन को 12-12 घंटे ड्यूटी करनी पड़ी। बता दें कि पूरनपुर स्टेशन पर अधीक्षक सहित पांच स्टेशन मास्टर तैनात हैं। स्टेशन मास्टर एसएन प्रसाद, मोहम्मद ईशा के अवकाश होने को लेकर शेष तीनों स्टेशन मास्टरों को आठ-आठ घंटा की ड्यूटी चल रही है। उधर, स्टेशन मास्टर राजीव ने बताया कि पूरी रात जगने और मंगलवार को पीलीभीत में डॉक्टरी जांच आदि कराने में लगे रहने के कारण ड्यूटी पर नहीं जा सके।
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पहले भी पूरनपुर पुलिस लांघती रही है ‘लक्ष्मण रेखा’
समीउद्दीन ‘नीलू’
पीलीभीत। बिना जीआरपी और रेलवे के अधिकारियों को सूचित किए स्टेशन पहुंचकर सोमवार की रात कक्ष के बाहर बैठे स्टेशन मास्टर ण्चं स्टाफ के लोगों के साथ की गई अभद्रता व दौड़ा कर पीटे जाने जैसी घटना पूरनपुर कोतवाली पुलिस के लिए कोई नई नहीं है। इससे पहले भी कोतवाली पुलिस ‘वर्दी’ की  ‘लक्ष्मण रेखा’ को लांघती रही है।
18 मार्च को शेरपुर में प्रतिबंधित पशु की तस्करी के आरोप में वांक्षित एक आरोपी की तलाश में कोतवाली पुलिस द्वारा आरोपी और उसके भाई के घर में मचाए गए उत्पात के दहशत के चलते आरोपी की भाभी की हार्ट अटैक से मौत होने की घटना खासी चर्चा में रही थी। इस मामले में भी पुलिस कानून को ताक पर रखकर आरोपी के घर बिना सर्च वारंट व बिना महिला पुलिस के आधी रात को घुस गई थी।
तब भी पुलिस ने ‘अपनों’ को बचाने के लिए पहले तो स्वीकार किया था कि वह मृतका के परिवार वालों के घर दबिश देने गई थी, लेकिन बिना सर्च वारंट वह भी रात में मात्र नामजद आरोपी की गिरफ्तारी को दबिश देने के मुद्दे पर वह फंस रही थी। लिहाजा अगले ही दिन पुलिस ने यह कह दिया कि वह मृतका के घर गई ही नहीं। अभिलेखों में भी कुछ ऐसा ही तस्करा दर्ज किया गया जिससे पुलिस आगे अपना बचाव कर सके।
इसी तरह स्टेशन मास्टर को स्टेशन पर पीटे जाने के मामले में भी पुलिस अपने को घिरता देख कुछ ऐसा ही कर रही है। पुलिस जानती है कि यह सवाल उठेगा कि वह स्टेशन पर बिना जीआरपी अथवा रेलवे अधिकारियों को सूचित किए बगैर रात में वहां क्यों पहुंची? इसलिए उसने इसका कारण अपने हिसाब से ढूंढ लिया है। कोतवाल का यह बयान कि बदमाशों की तलाश में पुलिस वहां गई थी।
स्टेशन मास्टर के पास खड़े बातें कर रहे दो संदिग्ध व्यक्ति पुलिस को देख लाइन पार कर भाग गए। जब भागे लोगों के बाबत स्टेशन मास्टर से पूछा गया तो वह अभद्रता करने लगे। पुलिस का यह तर्क किसी के गले नहीं उतर रहा है। पुलिस की यह बात भी अगर सही मान ली जाए तो यह सवाल उठता है कि अगर स्टेशन मास्टर के पास खड़े दो युवक पुलिस को देख भागने लगे तो पुलिस ने उनका पीछा क्यों नहीं किया?
ऐसे मौके पर पुलिस को बदमाशों का पीछा करना चाहिए था या उलझना चाहिए था? इसके अलावा यदि स्टेशन पर कई बदमाशों के होने की सूचना पुलिस को मिली थी तो मात्र पांच पुलिस वाले ही स्टेशन क्यों पहुंचे? यह सभी सवाल ऐसे हैं जो पुलिस को खुद उलझा रहे हैं। यहां भी पुलिस ने जीआरपी को सूचना दिए बगैर स्टेशन पहुंच कर वर्दी की लक्ष्मण रेखा को पार करने का ही काम किया।
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