राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू हो जाने से अधिकांश लोग परेशान हैं। दरअसल इस अधिनियम के लागू हो जाने से तमाम उपभोक्ताओं को राशन सामग्री नहीं मिल पा रही है। नये बनाए गए अधिकांश राशनकार्ड उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच सके हैं। जो नमूने भेजे गए हैं उनमे भी कुछ में यूनिट कम है तो कुछ में नाम, पते, फोटो गलत हैं। जिसका लाभ उठा कोटेदार उपभोक्ताओं को नया राशनकार्ड न मिलने का हवाला देकर बिना खाद्यान्न दिए टरका रहे हैं। यह हाल शहर से लेकर गांव तक का है। कोटेदार उपभोक्ताओं के हिस्से का आया खाद्यान्न कहां ले जा रहे हैं, इसकी जांच करने की भी महकमे को फुर्सत नहीं है। खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू होने के बाद उपभोक्ताओं के साथ किए जा रहे इस खेल की जमीनी हकीकत अमर उजाला हर ब्लाक में परखेगा। इसी कड़ी में पेश है बीसलपुर ब्लाक की ये रिपोर्ट-
अधिकांश उपभोक्ताओं को नहीं मिल रहा राशन
बीसलपुर। ब्लाक क्षेत्र में 80 कोटेदार हैं। राशनकार्ड धारकों की संख्या करीब 25 हजार है। इन कोटेदारों को राज्य खाद्य एवं आवश्यक वस्तु निगम के बीसलपुर डिपो से प्रत्येक माह राशन सामग्री मिलती है, लेकिन अधिकांश उपभोक्ताओं को खाद्यान कोटेदार उनके कार्ड अधूरे बता नहीं दे रहे हैं। यह हाल तब है जब अप्रैल माह में कोटेदारों को राशन सामग्री अधिक मिली है। डिपो के अभिलेखों के अनुसार माह मार्च में कोटेदारों ने 5031 क्विंटल गेहूं और 2156 क्विंटल चावल का उठान किया था जबकि अप्रैल में कोटेदारों ने 5176 क्विंटल गेहूं और 2218 क्विंटल चावल का उठान किया। उपभोक्ता आए दिन खाद्यान न मिलने के विरोध में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन शासन प्रशासन उन्हें इस समस्या से निजात नहीं दिला पा रहा है।
शिकायतों की कराई जा रही जांच
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू होने के बाद से तमाम उपभोक्ताओं की राशन न मिलने संबंधी शिकायतें मिलीं हैं। जिसकी सप्लाई इंस्पेक्टर से जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट मिलने पर दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- बीपी सिंह, एसडीएम
ग्रापंअ कर रहे सूची से मिलान: श्रीवास्तव
बीडीओ सीके श्रीवास्तव ने बताया कि डीएम के निर्देश पर ग्राम पंचायत अधिकारी दूसरे स्तरों से बनाई गई उपभोक्ताओं की सूची से मिलान कर रहे हैं। मिलान के बाद सही स्थिति सामने आ सकेगी।
बेवजह घसीटा जा रहा है कोटेदारों को
गांव रंपुरा के कोटेदार दिनेश चंद्र का कहना है कि राशन कार्डों के फार्म भरवाने में कोटेदारों की कोई गलती नहीं है और न ही कोटेदारों ने सूची बनाने के एवज में उपभोक्ताओं से कोई सुविधा शुल्क लिया है। कोटेदारों को इस मामले में बेवजह घसीटा जा रहा है।
वंचित रह गए 70 फीसदी पात्र
गोवल के पूर्व प्रधान रामकुमार वर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत बनाए गए राशन कार्डों में उनके गांव के 70 फीसदी पात्र लोग वंचित रह गए हैं।
पैसा देना रहा दुखद पहलू
गांव चठिया सेवाराम निवासी रामचंद्र वर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत लोगों को राशन कार्ड बनवाने में पैसे दिए जाने का मामला काफी दुखद पहलू रहा है।
पहले वाली ही व्यवस्था थी बेहतर
गांव मुड़िया करोड़ निवासी सतवार सिंह का कहना है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू हो जाने के बाद राशनकार्ड होने के बावजूद अभी तक उन्हें एक बार भी राशन सामग्री नहीं मिली है। बोले-इससे तो पहले वाली व्यवस्था ही बेहतर थी।
अधिकांश राशन कार्ड हैं गलत
पटनियां के प्रधान शिवदयाल का कहना है बनाए गए अधिकांश राशनकार्ड त्रुटिपूर्ण हैं। अधिकांश राशन कार्डों में कार्डधारकों के नाम, वल्दियत, यूनिट, फोटो और पते गलत हैं।
नहीं हो पा रहा है जनता का भला
गांव रंपुरा नगरिया निवासी सुरेंद्र गंगवार का कहना है कि सरकार ने जनता के भले के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू किया लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण जनता का भला नहीं हो पा रहा है।
उपभोक्ताओं का कोटेदार के विरोध में प्रदर्शन
बीसलपुर। गांव मुसेली के उपभोक्ताओं ने राशन वितरण में अनियमितता बरतने का आरोप लगाते हुए कोटेदार के विरोध में तहसील परिसर में प्रदर्शन किया।
पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार गांव मुसेली के तमाम उपभोक्ता बुधवार को तहसील परिसर में जमा हुए और कोटेदार के विरोध में प्रदर्शन, नारेबाजी करने लगे। उपभोक्ताओं का आरोप था कि कोटेदार राशन वितरण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी कर रहा है। विरोध करने पर अभद्र व्यवहार करता है। उपभोक्ता कोटेदार का लाइसेंस निरस्त कराने की मांग कर रहे थे। आधा घंटे तक प्रदर्शन करने के बाद उपभोक्ताओं ने एसडीएम बीपी सिंह को शिकायती पत्र दिया। प्रदर्शन करने वालों में सोनी देवी, चंपा देवी, तारवती, सुनहरा, सुनीता, नन्हेंलाल, लाड़ली देवी, विट्टो, परवीन बेगम, फूलवती, गंगा देवी और शाहीन बेगम सहित तमाम उपभोक्ता शामिल थे।