पूरनपुर। जिले में बसाए गए शरणार्थियों को अब जल्द जमीन का मालिकाना हक मिलने की उम्मीद जगी है। शासन स्तर पर इसको लेकर कवायद शुरू हो गई। इसके लिए बनाई गई कमेटी मौके पर सर्वे करवाने का काम कर रही है।
पाकिस्तान से अलग होकर बांग्लादेश बनने के दौरान वर्ष 1972-73 में बड़ी संख्या में शरणार्थी भारत आए थे। इनमें से कई को पीलीभीत में बसाया गया। चंदिया हजारा में 500 और गांव ढक्काचांट में 350 परिवारों के अलावा कलीनगर तहसील के गांव रमनगरा, गभिया सहराई, नौजलिया, पीलीभीत सदर तहसील के गांव न्यूरिया, माला, गजरौला में शरणार्थियों को बसाया गया। इन्हें खेतीबाड़ी के लिए जमीन भी दी गई।
आवंटित जमीन पर किसान फसलें उगा रहे हैं, मगर पांच दशक बाद भी विस्थापित परिवारों को दी गई जमीन का मालिकाना हक नहीं मिल सका। मालिकाना हक न मिलने से किसानों को किसान सम्मान निधि नहीं मिल रही है। फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो रही है। किसान क्रेडिट कार्ड सहित अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। जमीन का मालिकाना हक पाने के लिए किसान कई बार धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं।
मालिकाना हक के लिए शासन की ओर से अब मुरादाबाद कमिश्नर अन्जनेय कुमार सिंह की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। इसकी जानकारी मिलने के बाद से शरणार्थी परिवारों में खुशी की लहर है।
13 परिवारों को अब तक नहीं मिली जमीन
ग्राम पंचायत चंदिया हजारा में बसाए गए 500 में से 13 परिवारों को अब तक जमीन तक नहीं मिल सकी है। चंदिया हजारा गांव के प्रधान वासुदेव कुंडू ने बताया इन परिवारों को जमीन दिलाने के लिए कई बार कोशिश की गई मगर कामयाबी नहीं मिली। अब इन लोगों को भी जमीन मिलने की उम्मीद है।