होली का त्यौहार को
अभी चार दिन बाकी हैं। आमों के वृक्षों में आ गए बौर, बढ़ती धूप और पेड़ों
से हो रहा पतझड़ फाल्गुन का अहसास करा रहा है। घरों से लेकर बाजारों तक
होली के उत्सव की तैयारियां चल रही हैं, लेकिन इन तैयारियों से जिला जेल भी
पीछे नहीं है।
बंदी व कैदी ढोलक-मजीरे की ताल व हरमोनियम की सुरीली धुन पर
होली गीत गाने की कला सीख रहे हैं। इन दिनों जेल में होली खेलत रघुवीरा
अवध में, मोहे नंदलाल बरसाने होली आई आदि गीत जेल में गूंज रहे हैं।
घरों
से लेकर बाजारों तक होली पर्व की तैयारियां चल रही हैं। घरों की
रंगाई-पुताई हो रही हैं। महिलाओं ने घरों में नमकीन और मीठे व्यंजनों को भी
बनाना शुरू कर दिया है। सीखचों के पीछे रंग उत्सव धूमधाम से मनाने के लिए
बंदियों और कैदियों में भी फाल्गुनी उमंग है, हालांकि उनमें घर-परिवार से
दूर रहकर सलाखों के पीछे रंग उत्सव मनाने की टीस देखी गई।
बंदियों और
कैदियों ने जेल अधीक्षक से लोक और फाल्गुन गीत गाने की कला सीखने की इच्छा
जताई थी। इस पर जेल अधीक्षक ने उन्हें हरमोनियम, एकतारा, मजीरा, ढोलक, समेत
संगीत का साजो सामान उपलब्ध कराया है। होली गीत गाने वालों की एक छह
सदस्यीय टीम बनाई गई है।
टीम में शामिल रामदुलारे, निर्मल स्वरूप,
श्रीकृष्ण, हरीश, गुड्डू उर्फ मनोज, उमेश को बंदी ओमप्रकाश व रामस्वरूप
होली गीत सीखा रहे हैं। ढोलक मास्टर पिंटू उर्फ सोनी व मजीरा पर शेर सिंह
थाप दे रहे हैं। दोपहर एक बजे से दो घंटे चलने वाले इस कार्यक्रम के दौरान
होली के गीत, ढोलक की थाप और साजों की धुन जेल कैंपस में फाल्गुन की बयार
का अहसास करा देती है।
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बंदी होली
गीत गाने की तैयारी कर रहे हैं। बंदियों के इच्छा जताने पर जेल प्रशासन ने
सुर संगीत के सभी यंत्र उपलब्ध कराएं हैं। तैयारी के लिए प्रतिदिन दो घंटे
का ही समय दिया जाता है।
- विनोद कुमार, जेल अधीक्षक; जिला कारागार, पीलीभीत।