पीलीभीत। हिंदी हमारी मातृभाषा है। हिंदी के उत्थान के लिए धरातल पर ठोस कदम नहीं उठाया जाता है। उत्थान में किए जाने वाले सभी कार्य कागजों तक सिमटकर रह जाते हैं। हमें इस व्यवस्था को बदलना होगा। हिंदी को जन-जन की भाषा बनाने के लिए एक व्यक्ति या एक दिन किए जाने वाले प्रयास से कुछ नहीं होगा। इसके लिए सभी को मिलकर आगे आना होगा। हिंदी के उत्थान के लिए शिक्षा के साथ-साथ उसे सभी जगह शामिल करना होगा। इसके लिए उच्च स्तरीय पाठ्यक्रम सामग्री और सरल शब्दावली अगर बनाई जाए। तो हिंदी पढ़ने वाले और लिखने के प्रति लोगों की रुचि बढ़ेगी।
हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए सर्वप्रथम हमें उसको अपने दैनिक जीवन की लिखा-पढ़ी में प्राथमिकता से स्थान देना होगा। जिससे हमारी आने वाली पीढ़ी उससे प्रभावित हो और उसे अपनाएं। नई शिक्षा नीति में सरकार ने स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा देने की जो बात कही है उससे हम हिंदी भाषा को अपने अध्ययन और अध्यापन में प्रयोग करने से नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकेंगे। - पूनम सहगल, शिक्षिका
हिंदी एक सरल भाषा है। जिसके माध्यम से हम अपने विचारों को आसानी से प्रस्तुत कर सकते हैं। हम सभी को हिंदी भाषा का अधिक से अधिक प्रयोग करना चाहिए। कहते है कि किसी भी देश की उन्नति में वहां की भाषा का बहुत बड़ा योगदान होता है। हम भी हिंदी का प्रयोग करेंगे। तो देश उन्नति की ओर से अग्रसर होगा। हिंदी हमारा मान और सम्मान है। इसलिए सभी को इसके उत्थान के लिए आगे आना चाहिए। - राहुल सिंह, शिक्षक