पीलीभीत। जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस बी,सी (काला पीलिया) के मरीजों का इलाज आधा अधूरा हो रहा है। जांच के बाद मरीजों को वायरल लोड की जांच के लिए बरेली के चक्कर काटने पड़ते हैं। जांच के बाद मरीज को लखनऊ से आने वाली दवा के लिए भी 15 दिन तक इंतजार करना पड़ता है। हालांकि, जिम्मेदारी दवा सात दिन में आने का दावा करते हैं।
मेडिकल कॉलेज की ओर से माइक्रोबायोलॉजी विभाग तो बना दिया गया, लेकिन उसमें मरीजों को जांचों की मूलभूत सुविधा नहीं मिल पाई। जिला अस्पताल में आज भी हेपेटाइटिस बी व सी जैसे जरूरी मर्ज का इलाज अधूरा है। जिला अस्पताल आए मरीज की हेपेटाइटिस जांच तो हो जाती है, लेकिन उसके वायरल लोड की जांच के लिए तक्नीशियन न होने की वजह से बरेली जांच के लिए भेजा जाता है।
आर्थिक तंगी व मर्ज से जूझ रहे मरीज को मजबूरन गैर जनपद के चक्कर लगाने पड़ते हैं, कुछ मरीज निजी अस्पताल में जांच कराते हैं। जैसे-तैसे जांच निपटती है तो एक मरीज की लखनऊ से दवा आने में 15 दिन से ज्यादा का समय बीत जाता है।