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नटवरलाल बनाते रहे फर्जी गोल्डन कार्ड.. अफसर जानकर भी बने रहे अंजान

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पीलीभीत। जन सुविधा केंद्रों पर फर्जी गोल्डन कार्ड बनाने के मामले में भले ही जिला प्रशासन ने एक केंद्र संचालक पर कार्रवाई कर वाहवाही लूट ली हो, लेकिन हकीकत यह है कि शासन स्तर पर मामला पहुंचने के बाद ही अफसर गंभीर नजर आए। सूत्रों की मानें तो दो दिन पूर्व वीडियो कांफ्रेंसिंग में मुख्य सचिव ने खुद इस मामले में नाराजगी जताई थी। करीब बीस दिन पूर्व फर्जी गोल्डन कार्ड बरामद होने के बाद जिस आरोपी केंद्र संचालक पर पहले ही शिकंजा कसा जा सकता था, उस पर बुधवार को डीएम के निर्देश पर कार्रवाई की गई। ऐसे में सवाल यह है कि जिले में फर्जी गोल्डन कार्ड बनाने वालों के संरक्षणदाताओं पर कार्रवाई करने में प्रशासन कितनी संजीदगी दिखाएगा।
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शासन स्तर तक मामला पहुंचने पर बुधवार को डीएम वैभव श्रीवास्वत के निर्देश पर आनन-फानन में सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल, तहसीलदार पूरनपुर अनुराग सिंह, एसीएमओ डॉ. अश्वनी गुप्ता आदि ने देशनगर मोहल्ले में स्थित राजपूत जनसेवा केंद्र पर छापा मारकर 13 जून को बरामद किए गए 91 कार्डों में फर्जी मिले चार गोल्डन कार्डों से संबंधित दस्तावेज नहीं दिखा पाने पर केंद्र संचालक जितेंद्र पर कार्रवाई की थी। सीएससी के जिला समन्वयक पीयूष रत्न की ओर से कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इस प्रकरण में कार्रवाई के बाद भले ही स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने इतिश्री कर ली है, जबकि फर्जी गोल्डन बनाने का मामला पूर्व में भी कई बार प्रकाश में आ चुका है।

कई और भी जनसुविधा केंद्र हैं संदिग्ध
सूत्रों की मानें तो स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से कई और जन सुविधा केंद्रों पर भी दिव्यांग यूडीआई कार्ड की तरह गोल्डन कार्ड भी बनाए जा रहे हैं। शासन के देशनगर स्थित जन सुविधा केंद्र की शिकायत को गंभीरता से लेने पर उसके खिलाफ तो कार्रवाई हो गई, लेकिन बाकी सुविधा केंद्रों की जांच हो भी पाएगी या नहीं, यह स्वास्थ्य विभाग के अफसर अब तक तय नहीं कर पाए हैं।
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स्वास्थ्य विभाग के अफसर सिर्फ बयानबाजी तक सीमित
परिवहन निगम की बसों में निशुल्क यात्रा के लिए जन सुविधा केंद्रों पर फर्जी यूडीआई कार्ड बनाने का मामला हो या फिर लाभार्थियों के फर्जी गोल्डन कार्ड बनाने का। अफसर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ बयानबाजी तक सीमित है। पूर्व में भी इस तरह के कई मामले प्रकाश में आ चुके है। यूडीआई कार्ड फर्जी बनाने के मामले में पिछले दिनों स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने विशाल और सुमित नाम के दो युवकों को पकड़कर कोतवाली पुलिस के सुपुर्द तो कर दिया, लेकिन वह कब से यूडीआई कार्ड फर्जी बनाने का कार्य कर रहे थे, इसकी जानकारी जुटाना नहीं चाही। पुलिस ने आरोपियों को जेल भेजने के बाद मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया। इसी तरह गोल्डन मामले में भी स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का लापरवाह रवैया देखने को मिला है। केंद्र संचालक से पूछताछ करने के बजाय कार्रवाई के लिए कोतवाली पुलिस के सुपुर्द कर दिया।

जिला समन्वयक से अफसर नहीं उगलवा पा रहे राज
सीएससी के जिला समन्वयक पीयूष रत्न की मिलीभगत से ही जन सुविधा केंद्रों पर फर्जी गोल्डन कार्ड बनाए जाने की बात निकलकर सामने आई है। सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल यह बात स्वीकार भी करती हैं, लेकिन उसके खिलाफ कार्रवाई के सवाल पर खामोश हैं। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की मानें तो जिला समन्वयक से अगर ठीक से पूछताछ हो तो कई ओर राज खुल सकते हैं। एक जन सुविधा केंद्र संचालक पर तीन लॉगइन पासर्वी हंने के मतलब ही यही है कि उसे फर्जीवाड़ा करने के लिए संरक्षण दिया गया था। सूत्रों की मानें तो डीएम ने फर्जीवाड़ा की जानकारी पाहले ही मिल जाने के बावजूद जिला समन्वयक के खिलाफ एफआईआर नहीं कराने पर सीएमओ की फटकार भी लगाई। डीएम वैभव श्रीवास्तव के मुताबिक, उन्होंने अब इस पूरे मामले की गोपनीय जांच कर रिपोर्ट देने के सीएमओ को निर्देश दिए हैं।
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