पीलीभीत। आयुष्मान भारत योजना के पात्र मरीजों का प्राइवेट की तर्ज पर सरकारी अस्पताल में बेहतर इलाज करने का दावा खोखला साबित हो रहा है। योजना में चयनित सीएचसी के अलावा मुख्यालय पर एक भी सरकारी अस्पताल में अलग से कोई आयुष्मान वार्ड नहीं बनाया गया है। यहां एक बेड पर दो मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। वहीं प्राइवेट अस्पताल के संचालक मरीजों को भर्ती करने से इंकार कर रहे हैं। दबाव में यदि भर्ती कर भी ले तो हालत नाजुक बताकर रेफर कर देते हैं। ऐसे में गरीब परिवार के लोगों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
इलाज के अभाव में किसी की जान न जाए। समय रहते बेहतर से बेहतर उनका इलाज हो, इसके लिए शासन ने करीब आयुष्मान योजना शुरू की। इस योजना के जिले के पांच प्राईवेट नसिंगहोम के अलावा जिला पुरुष अस्पताल, जिला महिला अस्पताल और बीसलपुर सीएचसी को चयनित किया गया। शासन ने सरकारी अस्पतालों में अलग से आयुष्मान वार्ड का निर्माण कराने के साथ ही डॉक्टरों और कर्मचारियों को तैनात करने का आदेश दिया था। इतना ही नहीं जरूरत समझने पर पात्र मरीजों को मेडिकल स्टोर से दवा खरीदकर देने के लिए कहा। लेकिन जनपद में ठीक इसके विपरीत हो रहा है। बीसलपुर सीएचसी को छोड़ दिया जाए तो बाकी में आयुष्मान भारत के पात्र मरीजों को भर्ती कर इलाज करने के लिए अतिरिक्त वार्ड नहीं बनाया गया है। ऐसे में जिला महिला अस्पताल में आने वाले आयुष्मान भारत के मरीजों को एक बेड पर दो से तीन प्रसव पीड़िताओं को भर्ती कर चिकित्सक इलाज करते हैं। इतना ही नहीं सरकारी अस्पताल में जो दवा नहीं मिलती है वह अन्य मरीजों की तरह आयुष्मान भारत के मरीजों से भी खरीदवाई जाती है। जबकि शासन ने पात्र मरीजों का पांच लाख रुपये तक मुफ्त में इलाज कराने का आदेश दिया है। सरकारी अस्पताल में जांच और इलाज की प्रर्याप्त व्यवस्था न होने पर प्राइवेट में इलाज कराने को भी कह गया है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग इससे अंजान बना बैठा हैं। मरीज परेशान हो रहे हैं।
प्राइवेट अस्पताल संचालक भर्ती करने से खड़े कर देते हैं हाथ
आयुष्मान भारत योजना के पात्रता का कार्ड लेकर प्राइवेट अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को पहले तो डॉक्टर भर्ती करने से इंकार कर देते हैं। दबाव में भर्ती कर ले तो कमीशन वाली दवा सेटिंग वाले मेडिकल स्टोर से खरीदवाते हैं। मरीजों को कई तरह की जांच कराने के नाम पर इस कदर उलझा दिया जाता है कि वह मजबूरन अन्य अस्पताल की राह पकडने को मजबूर हो जाता है।
100 बेड के अस्पताल का संचालन जल्द ही शुरू हो जाएगा। उसी अस्पताल में दस बेड का अतिरिक्त आयुष्मान भारत वार्ड बना दिया जाएगा। प्राइवेट अस्पताल संचालक भर्ती कर इलाज नहीं कर रहे तो पीड़ित शिकायत करें, तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ।