बिलसंडा। सीएचसी में प्रसव के दौरान महिला की मौत के मामले में एसडीएम की जांच पर सीएमओ ने महिला डॉक्टर समेत तीन कर्मचारियों की वेतन वृद्धि रोक दी है।
गंाव आजपुर बरखेड़ा निवासी रामनिवास ने डीएम से शिकायत की थी कि उसने पत्नी पुष्पा देवी को प्रसव के लिए नौ मई को सीएचसी में भर्ती कराया था। जहां स्टाफ नर्स पहले तो प्रसव कराने में आनाकानी करती रही। बाद में 2500 रुपये लेकर 11 मई को स्वीपर की मदद से प्रसव कराया। बच्चे का जन्म होने के तुरंत बाद पुष्पा की तबीयत बिगड़ गई, लेकिन स्टाफ ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। कुछ देर बाद पुष्पा की मौत हो गई। रामनिवास ने पत्नी की मौत के लिए स्टाफ नर्स और स्वीपर को जिम्मेदार ठहराया। दोनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए थाने में तहरीर भी दी। डीएम ने मामले को गंभीरता से लेकर जांच एसडीएम बीसलपुर सौरभ दुबे को सौंप दी। एसडीएम ने जांच में सीएचसी के डॉ. प्रेम, महिला डॉक्टर शुचि गुप्ता और स्टाफ नर्स निशा को दोषी पाया। उन्होंने तीनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति कर रिपोर्ट डीएम को सौंप दी। डीएम के निर्देश पर सीएमओ ने तीनों दोषियों की वेेतन वृद्धि रोक दी है।
स्टाफ की लापरवाही से एक नवजात की भी हो चुकी है मौत
बिलसंडा। सीएचसी पर प्रसूता या नवजात की मौत का यह कोई अकेला मामला नहीं है। 26 अगस्त को कस्बा निवासी प्रमोद कुमार ने पत्नी विमला को प्रसव के लिए सीएचसी में भर्ती कराया था। स्टाफ नर्स ने विमला का प्रसव कराया, लेकिन कुछ ही देर बाद ही नवजात की मौत हो गई। घरवालों ने सीएचसी स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मामले की जिला प्रशासन से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।