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मुंबई में डॉक्टर की डिग्रियों की वैधता का नहीं मिला कोई प्रमाण

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पीलीभीत। लाश को वेंटिलेटर पर रखकर इलाज के नाम पर वसूली और फर्जी डिग्री से अस्पताल संचालित करने के आरोपी डॉक्टर ने मुंबई के किंग एडवर्ड मेडिकल कॉलेज से सिर्फ एक साल की इंटर्नशिप की थी। उनको वहां से कोई डिग्री नहीं दी गई। न ही उन्होंने वहां कोई पढ़ाई की। लिहाजा डिग्रियों की वैधता का इस कॉलेज से कोई प्रमाण नहीं मिल सका है। फिलहाल टीम के वापस आने के बाद इस पर अफसर मंथन कर निर्णय लेंगे।
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एक अस्पताल के डॉक्टर के खिलाफ संगीन आरोप लगने के बाद एसीएमओ की ओर से सुनगढ़ी थाने में धोखाधड़ी, कूटरचित अभिलेख तैयार करने आदि धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई थी। एमएस और एमसीएच की डिग्री की जांच करने के लिए टीम मुंबई में है। वहां पर चल रही कार्रवाई को लेकर अफसर अभी कुछ बोल नहीं रहे हैं। टीम के वापस आने के बाद स्थिति स्पष्ट होने की बात कही जा रही है। सूत्रों की मानें तो टीम मुंबई के मेडिकल कॉलेज की फैकल्टी से मुलाकात कर चुकी है। इसमें किंग एडवर्ड मेडिकल कॉलेज से एक साल की इंटर्नशिप करने की जानकारी मिली है। वहां से कोई डिग्री डॉक्टर को नहीं दी गई है। डिग्रियों की वैधता को लेकर कोई रिकार्ड मुंबई से नहीं मिल सका है। फिलहाल अधिकारी टीम के वापस आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट करने की बात कह रहे हैं। टीम को क्या प्रमाण मिले और कार्रवाई कहां तक पहुंची, इसको लेकर जानकारी साझा नहीं की जा रही है।
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