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डीएम का आदेश बेअसर..कार्रवाई टाल रहे अफसर

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पीलीभीत। अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में गर्भस्थ जीवित शिशु को मृत दर्शाने वाले अल्ट्रासाउंड सेंटर पर शिकंजा कसने को भले ही डीएम वैभव श्रीवास्तव ने स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को जांच कर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हों, लेकिन हकीकत यह है कि अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालक के रसूख और सत्ताधारी नेताओं की पैरवी से अफसर बैकफुट पर आ गए हैं। कार्रवाई तो दूर अब तक जांच ही शुरू नहीं हो सकी है। सिर्फ खानापूर्ति कर प्रशासन को गुमराह करने का काम किया जा रहा है।
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पिछले दिनों एक अल्ट्रासाउंड सेेंटर पर डॉक्टर के गैर जिम्मेदाराना रवैये से जिला प्रशासन ही नहीं स्वास्थ्य विभाग में भी अफरातफरी मच गई थी। मामला अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में जीवित गर्भस्थ शिशु को मृत दिखाने का था। कस्बा न्यूरिया निवासी नदीम ने गांधी स्टेडियम रोड स्थित एक प्राइवेट नर्सिंग होम में पत्नी नेहा परवीन को दिखाने के बाद डॉक्टर की सलाह पर 24 जुलाई को उक्त सेंटर पर अल्ट्रासाउंड कराया था। जहां डॉक्टर ने गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य की जांच रिपोर्ट निगेटिव देकर परिवार के होश उड़ा दिए थे। आरोप है कि गर्भ में मृत बच्चे से महिला की जान को खतरा बताकर गर्भपात कराने का दबाव बनाया जाने लगा। इस बीच जांच रिपोर्ट पर शक होने पर नदीम ने 25 और 26 जुलाई को दो अन्य अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड कराया। यहां की जांच रिपोर्ट नार्मल आई। नदीम ने इसकी शिकायत पिछले दिनों जब शासन स्तर पर की तो डीएम ने सख्त तेवर दिखाए। इस पर प्रभारी सीएमओ ने आनन-फानन में जांच एसीएमओ डॉ. राजेश भट्ट को सौंप दी। चर्चा है कि अल्ट्रासाउंड सेंटर एक सत्ताधारी नेता के संरक्षण में चल रहा है। यही वजह है कि डीएम के आदेश को स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने हवा में उड़ा दिया है। शुरू में प्रशासन की कार्रवाई से बचने को गायब होने वाले डॅाक्टर दंपती पूर्व की भांति ही अल्ट्रासाउंड कर खिलवाड़ कर रहे हैं।

यह प्रकरण बेहद गंभीर है। पूर्व में ही स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को जांच के निर्देश दिए जा चुके हैं। अभी तक जांच क्यों नहीं शुरू हो सकी, इसका पता लगाया जाएगा।
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- वैभव श्रीवास्तव, डीएम
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