डीएम के आदेश हवा में, अल्ट्रासाउंड सेंटर की नहीं शुरू हो सकी जांच
पीलीभीत। अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में जीवित शिशु को मृत दर्शाने के मामले में डीएम की सख्ती स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के सामने महज दिखावा बनकर रह गई। डीएम के सख्त निर्देश पर प्रभारी सीएमओ ने भले ही एसीएमओ डॉ. राजेश भट्ट को प्रकरण की जांच सौंप किनारा कर लिया, लेकिन हकीकत यह है कि जांच में नाम पर मामले को दबाने का काम किया जा रहा है। इतना ही नहीं अफसरों के रहमो करम से अल्ट्रासाउंड अब भी किए जा रहे हैं।
कस्बा न्यूरिया निवासी नदीम ने गर्भवती पत्नी नेहा परवीन का 29 जून को डॉक्टर की सलाह पर 24 जुलाई को टनकपुर हाईवे स्थित एक अल्ट्रासाउंड सेंटर पर जांच कराई थी। जिसमें गर्भ में पल रहे शिशु की जांच रिपोर्ट निगेटिव देकर गर्भवती की जान को खतरा बताकर गर्भपात कराने का दबाव बनाया गया। जांच रिपोर्ट पर भरोसा न कर 25 और 26 जुलाई को नदीम ने अन्य अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराया तो रिपोर्ट नार्मल थी। यह रिपोर्ट नदीम ने पत्नी का चेकअप करने वाली महिला डॉक्टर को दिखाई तो मृत शिशु की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट ही सही बताकर परिवार वालों के होश उड़ा दिए। इतना ही नहीं मंगलवार को अखबारों की सुर्खियां बने अल्ट्रासाउंड सेंटर से डॉक्टर दंपती गायब हो गए। इधर, स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने भी डीएम वैभव श्रीवास्तव का आदेश हवा में उड़ा दिया। तीसरे दिन भी जांच शुरू नहीं हो सकी है। वहीं अल्ट्रासाउंड सेंटर पर डॉक्टर दंपति ने फिर अल्ट्रासाउंड करना शुरू कर दिया है। प्रभारी सीएमओ डॉ. अश्वनी गुप्ता का कहना है कि मामला गंभीर जल्द इसस प्रकरण की जांच पूरी कर ली जाएगी। ब्यूरो