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डीएम ने सीएमओ का जवाब तलब किया

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पीलीभीत। क्लेम पाने के लिए दो बार मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने वाली महिला की आंख के तीसरे ऑपरेशन का पंजीकरण दर्शाने के मामले में अब स्वास्थ्य विभाग के अफसर भी रडार पर है। अमर उजाला में छपी खबर को संज्ञान में लेकर डीएम ने सीएमओ का जवाब तलब किया है। वहीं अब शासन स्तर पर ऑडिट में फर्जीवाड़ा पकड़े जाने और डीएम की सख्ती के बाद स्वास्थ्य विभाग के अफसर इसे अपनी चूक बता रहे है। सूत्रों की मानें तो प्रकरण की जांच के लिए स्टेट हेड भी सीएमओ कार्यालय पहुंच सकते हैं।
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गरीबों को पांच लाख तक के मुफ्त इलाज की सुविधा देने के लिहाज से शासन ने शुरू की आयुष्मान भारत योजना को जिले के चिकित्सक पलीता लगा रहे है। नौगवां पकड़िया निवासी गेंदा देवी ने मोतियाबिंद की शिकायत पर तीन फरवरी को एक नेत्र चिकित्सालय में पंजीकरण कराया था, लेकिन वह इलाज को नहीं पहुंचीं। डॉक्टर ने क्लेम के चक्कर में पंजीकरण निरस्त नहीं किया। दूसरी बार 21 फरवरी और तीसरी दफा 22 मार्च को पंजीकरण कराया गया। बाद में दो बार पंजीकरण पर दोनों आंखों का ऑपरेशन हुआ। इसका भुगतान सरकार द्वारा किया जाना था। लिहाजा शासन स्तर पर हुए ऑडिट में खेल उजागर हो गया। आयुष्मान के मैनेजर डॉ. अटलमणि शुक्ला की जांच में पता चला कि 22 जुलाई को गेंदा देवी की मौत हो चुकी है। मोतियाबिंद के दो ऑपरेशन हुए थे। सबसे पहले वाला पंजीकरण निरस्त नहीं किया गया था। इसके बाद भी अफसर खुद का बचाव करते दिखे। मगर जब अमर उजाला ने तीन अगस्त को खबर प्रमुखता से प्रकाशित की और डीएम ने प्रकरण गंभीर बताते हुए सीएमओ का जवाब तलब किया तब जाकर विभागीय अधिकारी स्थानीय स्तर पर हुए ऑडिट में चूक होने की बात कहते दिखे। सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
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