पीलीभीत। लाश को वेंटिलेटर पर रखकर इलाज करने के नाम पर परिजन से एक लाख रुपये ऐंठने के मामले में अफसर किस कदर दबाव में हैं, इसका अंदाजा उनके बयानों में लगातार सामने आ रहे विरोधाभास से लगाया जा सकता है। डीएम जहां कार्रवाई के लिए सीएमओ को निर्देशित करने की बात कह रहे हैं, वहीं सीएमओ का कहना है कि उन्हें इस तरह का कोई निर्देश नहीं मिला है। ऐसे में डॉक्टर को बचाने के लिए प्रशासन की जोर आजमाइश खुलकर सामने आ गई है। इसके पीछे भी सत्ता के दबाव को अहम वजह बताया जा रहा है।
पूरनपुर निवासी राजू की लाश का इलाज करने के मामले में फंसे शहर के निजी अस्पताल संचालक का मामला इन दिनों सुर्खियों में हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अलावा तीन एसीएमओ के पैनल की जांच रिपोर्ट में आठ जून को राजू की मौत उसे रेफर करने से सात घंटे पहले होना बताया गया। यानी जब राजू का वेंटिलेटर पर रखकर इलाज किया जा रहा है था, तब वह मर चुका था। सीएमओ ने आरोपों की पुष्टि कर चिकित्सक के खिलाफ विधिक कार्रवाई की संस्तुति की थी। माना जा रहा था कि अस्पताल संचालक पर कार्रवाई होगी, लेकिन कुछ ही समय में इस मामले में प्रशासन ने खेल कर दिया। सत्ता के दबाव में कार्रवाई करने के बजाए हाथ पीछे खींच लिए। मामला हाईप्रोपाइल होने के चलते प्रशासन को भी मैनेज किया गया। मृतक की पत्नी शारदा देवी और उसके पिता इतवारी लाल ने चिकित्सक पर कार्रवाई न करने का शपथपत्र भी दे दिया। वहीं अब आरोपी चिकित्सक पर सख्त कार्रवाई का दावा करने वाले अफसर बैकफुट पर हैं। डॉक्टर पर कार्रवाई को लेेकर डीएम-सीएमओ के बयान में विरोधाभास दिख रहा है। डीएम वैभव श्रीवास्तव जहां कार्रवाई के लिए सीएमओ को निर्देश दे देने की बात कह रहे हैं, वहीं सीएमओ ने स्पष्ट कहा है कि उनको इस तरह का कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है।
...तो कहीं इसलिए तो अवकाश पर नहीं सीएमओ
सूत्रों की मानें तो अफसरों पर सत्ताधारी नेताओं का दबाव इस कदर है कि वह आरोपी डॉक्टर पर कार्रवाई की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे। लाश का इलाज करने की शिकायत के बाद आरोपी डॉक्टर की एमसीएच की डिग्री फर्जी निकलने पर डीएम वैभव श्रीवास्तव ने कार्रवाई के लिए सीएमओ को निर्देश देने की बात कही, लेकिन गुरुवार को सीएमओ अवकाश पर चली गईं। इसे लेकर भी चर्चाएं तेज हैं।