- ट्रामा सेंटर में रैलिंग और परिजनों के सहार परामर्श के लिए पहुंच रहे मरीज
-हड्डी रोगियों के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव
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संवाद न्यूज एजेंसी
पीलीभीत। संसाधनों के अभाव में जूझ रहे जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में बुनियादी समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। हड्डी रोगियों को स्ट्रेचर, व्हीलचेयर और कर्मचारियों के अभाव में खुद ही दर्द से कराहकर परामर्श कक्ष तक पहुंचना पड़ता है। मरीज रैंप पर लगे रैलिंग और परिजनों के सहारे चिकित्सक से परामर्श के लिए पहुंच रहे हैं। कई बार गंभीर मरीजों के लिए चुनौती खड़ी हो जाती है।
मेडिकल कॉलेज के आने के बाद भले ही जिला अस्पताल में संसाधन और सुविधाएं बढ़ रही हों लेकिन जिम्मेदारों का बुनियादी जरूरतों पर ध्यान नहीं जाता। सुविधाएं और संसाधन ट्रामा सेंटर से नदारद हैं। हड्डी मरीजों का इलाज चुनौती से कम नहीं है। लंबे समय से ट्रामा सेंटर में हड्डी मरीज पहुंचकर इलाज करा रहे हैं जिन्हें व्हील चेयर, स्ट्रेचर नहीं होने के चलते खुद ही रैंप पर चढ़कर परामर्श तक पहुंचना पड़ता है। कर्मचारी नहीं होने के चलते इनको कोई सहयोग भी नहीं मिल पाता है। कुछ हड्डी के गंभीर मरीजों को अपने परिजनों को सहारा मिल जाता है लेकिन जो अकेले पहुंचते है उनको बिना संसाधनों के रैंप से घिसटना पड़ता है। इन बुनियादी जरूरतें पूरी करने की ओर जिम्मेदार नहीं सोचते।
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पूर्व सीएमएस करते हैं ट्रामा सेंटर में इलाज
ट्रामा सेंटर में वरिष्ठ हड्डी रोग चिकित्सक और पूर्व सीएमएस डॉ. संजीव सक्सेना मरीजों का इलाज लंबे समय से करते आ रहे हैं लेकिन एक जिम्मेदार पद पर रहने के अनुभव के बाद भी उनको कभी अपने हड्डी रोगियों के लिए ट्रामा सेंटर की अव्यवस्थाएं नहीं दिखी।
वर्जन
ट्रामा सेंटर में व्हील चेयर, स्ट्रेचर आदि की व्यवस्था कराई गई थी। जानकारी करके मरीजों को सुविधा दी जाएगी।
डॉ. रमाकांत सागर, अधीक्षक जिला अस्पताल