पीलीभीत। हाथरस में बिटिया के साथ हुई हैवानियत से एक बार फिर आधी आबादी में उबाल है। हर जंग में अपराजिता समझी जानी वाली महिलाएं भी इस वीभत्स कांड से बहुत गुस्से में है। सामूहिक दुष्कर्म पीड़ित बिटिया की मौत की खबर से तमाम लोगों का धैर्य जवाब दे दिया। महिलाओं ने गम और गुस्से का जबरदस्त इजहार करते हुए महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि दिल्ली में निर्भया कांड के बाद तमाम कानून बने, मगर देश की लचर और भ्रष्ट कानून व्यवस्था की वजह से बेटियों पर हैवानियत की घटनाओं को सिलसिला थम नहीं रहा। दरिंदे अब भी बेखौफ हैं। जब तक ऐसी घटना करने वालों में कानून का खौफ नहीं होगा, जब तक आधी आबादी पर अत्याचार रुकने वाला नहीं है। ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सड़क पर होने वाली छोटी मोटी छींटाकशी भी उसी तरह कार्रवाई होनी चाहिए, जैसी बड़ी घटनाओं में होती है।
दिल्ली के निर्भया कांड में ठीक आठ साल पहले देश भर में सड़कों पर महिलाओं के आत्मसम्मान के प्रति जिस तरह की जनआक्रोश देखा गया था, ठीक वैसा ही आक्रोश हाथरस कांड पर भी दिखने लगा है। दिल्ली की घटना के बाद दरिंदों को सख्त सजा मिली तो लगने लगा था कि समाज में महिलाओं के साथ होने वाली घटनाओं में कमी आएगी। हर किसी में महिला अपराध के प्रति जागरूकता पैदा होगी। ऐसे कृत्यों में लिप्त असामाजिक तत्वों के हौसले पस्त होंगेे, मगर यह विडंबना ही है कि समूचे तंत्र को झकझोर देने वाले निर्भया कांड के बाद भी इस तरह की जघन्य वारदातों में कमी नहीं आई। शायद ही ऐसा कोई दिन बीतता हो, जब आधी आबादी से जुड़े अपराध के मामले सामने न आते हो। महिलाओं को लगता है कि वह आज भी वह सुरक्षित नहीं है।
बोलीं मातृशक्ति: दरिंदों को सजा देने में न हो देरी
महिला अपराध रोकने के लिए कानून तो बनते हैं, मगर उनका क्रियान्वयन उस तरह नहीं होता, जिस तरह से होना चाहिए। महिला अपराध पर अंकुश लगाने के लिए जमीनी स्तर से कानून का पालन हो। - जसकौर बिंद्रा, छात्रा
निर्भया कांड के बाद जिस तरह से लोगों ने जागरूकता दिखाई थी, उससे लगने लगा था कि अब बेटियां असुरक्षित नहीं है, मगर ऐसा नहीं है। ओछी मानसिकता वालों की सोच बदलने के लिए कानून भी अब सख्ती से पेश आए। - पार्वती, छात्रा, जेएमबी डिग्री कॉलेज
पहले निर्भया कांड और अब हाथरस कांड। क्या कहा जाए कि बेटियां अब भी सुरक्षित है। यह कहना सरासर गलत होगा। जब तक कानून का जमीनी स्तर पर सख्ती से पालन नहीं होगा, महिला अपराध इसी तरह से बढ़ते रहेंगे। - वंदना गंगवार, छात्रा, आईटीआई
हाथरस की घटना ने अंतरमन झकझोर दिया है। ऐसी घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं। न्याय मिलने से ही ऐसी घटनाएं नहीं रुकेगीं, इसके लिए सामाजिक जागरूकता और भय होना अत्यंत आवश्यक है। हमें लिंग भेद खत्म करना होगा। - मीना कुमारी, प्रधानाचार्य एसकेजेपी इंटर कालेज बीसलपुर
रिश्ते बेटियों से ही बनते है। अगर समाज में बेटियों की इस तरह से हत्या होती रही तो सब कुछ खत्म हो जाएगा। हाथरस की घटना बेहद घृणित है। ऐसे अपराध करने वालों को सीधे फांसी की सजा होनी चाहिए। - डॉ. अर्निका दीक्षित, प्रवक्ता पुरनपुर
समाज बेटियों के साथ होने वाले दर्दनाक अत्याचार को कैसे और कब तक सहन करेगा। सरकार को ऐसी घटनाओं के दरिंदों को सीधे फांसी की सजा का प्रावधान कर देना चाहिए। परिवार वालों को बेटी का शव न सौंपने की जांच हो। - डॉ. रंजना सिंह, प्रवक्ता पुरनपुर
महिला समाज की निर्माता है। महिलाओं पर अत्याचार कब तक बर्दाश्त किए जाएंगे। दरिंदों को फांसी की सजा मिलने पर ही बेटी के परिवार को न्याय मिलेगा और उसकी आत्मा को शांति मिलेगी। -डॉ. रेखा सिंह, प्रवक्ता हिंदी पुरनपुर
हाथरस की बेटी के साथ हुई घटना ने दिल दहला कर रख दिया है। घटना की जितनी निंदा की जाए, कम है। दरिंदों को ऐसी सजा मिले कि आगे इस तरह का दुस्साहस न हो सके। बेटी के साथ दर्दनाक घटना भुलाई नहीं जा सकती। - तहमीना शमसी, प्रवक्ता उर्दू पुरनपुर