ग्राम पंचायत के संपन्न चुनाव के बाद यहां कई ऐसी ग्राम पंचायतों में महिलाओं ने कब्जा जमा लिया है जो महिलाओं के लिए आरक्षित नहीं थी। इनमें से कुछ महिलाएं तो खुद की मेहनत से यह मुकाम हासिल कर सकी हैं जबकि कुछ के पति विभिन्न कारणों के चलते अपनी पत्नी को चुनाव लड़ा प्रधान बनवा दिया। इसे भले ही आप पर्दे के पीछे लोकतंत्र कह सकते हैं, लेकिन इससे पंचायत में आधी आबादी के मजबूत होने की बात से इंकार नहीं किया जा सकता।
संघर्षशील छवि से पाया मुकाम
पूरनपुर विकास खंड क्षेत्र के ग्राम सिद्धनगर निवासी निरक्षर नीरज मिश्रा की गिनती जुझारू महिलाओं में की जाती है। उनके पति राजेश किसान हैं। पिछले पंचायत चुनाव में इस ग्राम पंचायत का प्रधान पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित था। तब नीरज मिश्रा चुनाव हार गईं थीं, लेकिन इसके बाद भी वह गांव के लोगों के लिए संघर्ष करती रहीं। इस बार इस गांव की सीट अनारक्षित होने के बाद भी वह चुनाव में उतरीं और चुनाव जीत गांव की मुखिया बनीं। इनमे अधिकांश महिलाओं की उम्र 35 साल से कम है।
होमगार्ड की पत्नी प्रेमवती ने पुरुषों को पछाड़ा
बीसलपुर विकास खंड क्षेत्र के ग्राम अमृता खास निवासी होमगार्ड रामप्रकाश की पत्नी प्रेमवती वर्ष 2000 में भी प्रधान निर्वाचित हुईं थीं। तब यह सीट अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित थी। इस बार यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी जिस पर प्रेमवती चुनाव लड़ी और जीतीं।
अध्यापक ने पत्नी को बनवाया प्रधान
बिलसंडा विकास खंड क्षेत्र के ग्राम बबूरा से प्रधान निर्वाचित हुईं जया कुशवाहा के पति संजीव कुशवाहा सहायक अध्यापक हैं। गांव में उन्हीं की पकड़ भी है, इसलिए उन्होंने पत्नी को इस अनारक्षित सीट पर चुनाव लड़वा प्रधान बनवा दिया। 27 वर्षीय जया की शैक्षिक योग्यता हाईस्कूल है।
दलित महिला ने पिछड़ों को पछाड़ा
बिलसंडा क्षेत्र के ग्राम लिलहर के अनारक्षित प्रधान पद पर निर्वाचित हुईं कमलेश कुमारी गौतम के पति किसान हैं। इस चुनाव में कमलेश के अलावा अधिकांश उम्मीदवार पिछड़ी जाति से ताल्लुक रखते थे। इसके बाद भी कमलेश ने सभी को पछाड़ प्रधानी हासिल कर ली।
मां को अध्यापक, रोजगार सेवक बेटों ने बनवाया प्रधान
बिलसंडा के ग्राम हेमपुर से अनारक्षित प्रधान पद पर निर्वाचित हुई स्व. वेदप्रकाश की 69 वर्षीय बेवा एवं अन्य पिछड़ा वर्ग से ताल्लुक रखने वाली प्राइमरी पास सत्यवती का यूं तो गांव में अपनी कोई खास पकड़ नहीं है, लेकिन उनका एक बेटा मदनलाल अध्यापक है तथा दूसरा संतोष रोजगार सेवक। दोनों व्यवहार कुशल हैं तथा गांव में उनकी मजबूत पकड़ भी। दोनों खुद चुनाव नहीं लड़ सकते लिहाजा उन्होंने सत्यवती को चुनाव जिला अप्रत्यक्ष रूप से प्रधानी की बागडोर अपने हाथ कर ली है।
बिहारीपुर हीरा के अनारक्षित प्रधान पद पर निर्वाचित हुईं 21 वर्षीय प्रियंका गंगवार के पति सुमित गंगवार अध्यापक है। इसलिए उन्होंने पत्नी को चुनाव मैदान में उतार अप्रत्यक्ष रूप से प्रधानी अपने कब्जे में कर ली है।
पिछड़ी जाति महिलाओं ने सामान्य को पछाड़ा
जिले के विकास खंड अमरिया की अनारक्षित प्रधान पद की पांच ग्राम पंचायतों में पिछड़ी जाति महिलाओं ने कब्जा जमा लिया। इन महिलाओं में ग्राम पंचायत बिसेन से प्रधान निर्वाचित हुई रमादेवी पत्नी सोमपाल, बगवा से अनीता देवी पत्नी पप्पू, कल्यानपुर चकरतीरथ से जयदेवी पत्नी मनोहर लाल, पंसोली से ओमवती पत्नी रामपाल तथा करगैनी से शबाना पत्नी मो. सलीम शामिल हैं। इनमे ओमवती (51) को छोड़ शेष सभी महिलाओं की उम्र 35 साल से कम है।
प्रधान दंपति ने ली शपथ
शपथग्रहण समारोह में शामिल एक दंपति आकर्षण का केंद्र बने रहे। मरौरी विकास खंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत लालपुरिया साहिब सिंह से प्रधान निर्वाचित हुए भूपराम व पूरवा मूड़ा से प्रधान निर्वाचित खुशालो देवी आकर्षण का केंद्र बने। दोनों प्रधानों के बीच पति-पत्नी का रिश्ता है। दोनों जिस गांव से प्रधान बने हैं वह उनकी ससुराल है। भूपराम इससे पहले पुरवामूड़ा के भी एक बार प्रधान रह चुके हैं। उनकी खेती व घर ललपुरिया साहिब सिंह में भी है लिहाजा उन्होंने पुरवामूड़ा से नाम कटवा इस बार ललपुरिया साहिब सिंह में जोड़वा लिया था तथा वहां से किस्मत भी आजमाई।