पीलीभीत। जिला अस्पताल में कुष्ठ रोगियों के इलाज की व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है। सिर्फ चार एनएमए (गैर-चिकित्सा सहायक) पर ही जिले के कुष्ठ रोगियों के इलाज का जिम्मा है। यही वजह है कि ठीक होने वाले मरीजों का आंकड़ा न के बराबर है, जबकि इस वर्ष जिले में 123 कुष्ठ राेगी चिह्नित किए गए हैं।
कुष्ठ रोग एक त्वचा संक्रमित रोग है, जो एक से दूसरे में फैलता है। जिले में वर्ष 2024-25 में कुल कुष्ठ रोगियों की संख्या 123 रही थी। वर्ष 2025-26 में अब तक 123 मरीज चिह्नित किए जा चुके हैं। मरीजों के मिलने की संख्या में तो कमी नहीं आई। मगर, इलाज की व्यवस्था जरूर लड़खड़ा गई है। दोनों वर्ष में ठीक होने वाले मरीजों की संख्या 15 से ऊपर नहीं पहुंच सकी।
चिह्नित कुष्ठ रोगियों के इलाज का जिम्मा चार एनएमए पर है।
जिले के सभी सात ब्लॉक की सीएचसी-पीएचसी पर आने वाले मरीजों की जांच और इलाज का दारोमदार यही एनएमए संभाल रहे हैं। कम स्टाफ व संसाधन के चलते आपस में सीएचसी बांट रखी हैं। मेडिकल कॉलेज से संबद्धीकरण के बाद भी जिला अस्पताल में कुष्ठ रोग के इलाज को लेकर लापरवाही बरती जा रही है।
अभी तक त्वचा विभागध्यक्ष की ओर से सिर्फ कुष्ठ रेागियों की जांच ही की जा रही है। दवाएं नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ही मिल रही हैं। सीएमओ डॉ. आलोक कुमार शर्मा ने बताया कि मांग पर जिला अस्पताल को दवाएं मुहैया कराई गई हैं।