पीलीभीत। कशिश पटेल की हत्या ने मेडिकल कॉलेज की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर किए हैं। घटना के बाद आक्रोशित सहपाठियों ने आरोप लगाया कि कशिश ने मार्च में आरोपी की हरकतों से परेशान होकर मेडिकल कॉलेज की प्रधानाचार्य को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन उसपर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। छात्रों का कहना है कि यदि समय रहते शिकायत को गंभीरता से लिया गया होता तो मंगलवार को हुई यह दर्दनाक घटना टल सकती थी।
छात्र-छात्राओं के अनुसार, आरोपी सागर सिंह की सनक के चलते लंबे समय से कशिश पर दबाव बना रहा था। वह कक्षा से लेकर अस्पताल की ड्यूटी तक उसका पीछा करता और बातचीत करने का प्रयास करता था। कशिश लगातार इन हरकतों से परेशान थी। मानसिक रूप से प्रताड़ित होने के बाद उसने मार्च में मेडिकल कॉलेज की प्रधानाचार्य डॉ. संगीता को लिखित शिकायत देकर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
आरोप है कि शिकायत के बावजूद न तो आरोपी को चेतावनी दी गई और न ही कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई। छात्र-छात्राओं का कहना है कि शिकायत के बाद भी आरोपी के हौसले कम नहीं हुए। वह लगातार कशिश के संपर्क में आने की कोशिश करता रहा, जबकि कॉलेज प्रशासन पूरे मामले से अनजान बना रहा। आखिरकार मंगलवार सुबह उसने सीटी स्कैन कक्ष के बाहर चाकू से हमला कर कशिश की हत्या कर दी।
घटना के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रधानाचार्य के अवकाश पर होने का हवाला देते हुए प्रभारी प्रधानाचार्य डॉ. अरुण ने पूरे मामले में विस्तृत जांच के बाद ही कुछ कहने की बात कही। वहीं छात्र-छात्राओं ने परिसर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, शिकायतों के त्वरित निस्तारण और छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
पहले भी होती रहीं घटना, सिद्धार्थनगर की एक छात्रा ने खा लिया था विषाक्त पदार्थ : छात्र-छात्राओं ने दावा किया कि यह मेडिकल कॉलेज में उत्पीड़न का पहला मामला नहीं है। उनके अनुसार, पैरामेडिकल कोर्स से जुड़ी सिद्धार्थनगर की रहने वाली प्रथम वर्ष की एक छात्रा ने भी किसी कॉलेज स्टाफ की ऐसी ही हरकतों से परेशान होकर कुछ माह पूर्व विषाक्त पदार्थ खा लिया था। तीन दिन तक चले उपचार के बाद उसकी जान बच गई थी, लेकिन उस घटना को भी गंभीरता से लेने के बजाय दबा दिया गया। इसके अलावा कॉलेज परिसर में छात्रों के बीच विवाद और झगड़े की घटनाएं भी समय-समय पर सामने आती रही हैं। संवाद