माधोटांडा। योगी सरकार का मकसद गोवंशीय पशुओं के भरण पोषण के साथ उनकी सुरक्षा भी है। मगर परशुराम गांव में तो आबादी से काफी दूर जंगल के पास गोशाला बना दी। इसमें इस समय 31 गायें हैं, मगर ये गाय तस्करों के हाथ में लगने की पूरी आशंका है क्योंकि माधोटांडा से कलीनगर और शेरपुर से लेकर पूरनपुर तक का इलाका गायों की तस्करी के लिए जाना जाता है। इस इलाके में बड़ी संख्या में तस्कर सक्रिय रहते हैं। बीते दो तीन महीने में कई तस्कर जेल भेजे गए।
कलीनगर तहसील क्षेत्र के परशुरामपुर गांव में टाइगर रिजर्व के जंगल की सीमा पर 11.50 लाख से यह गोशाला बनवाई गई है। सुनसान इलाके में गोशाला बनाकर सिर्फ बजट खपाया गया। इसका गायों की सुरक्षा से मतलब नहीं है। गांव वाले भी इस गोशाला में गोवंशीय पशु पूरी तरह असुरक्षित मान रहे हैं। यहां गोवंशीय पशुओं की तस्करों और वन्य जीवों से निगरानी करना किसी चुनौती से कम नहीं। वन्यजीवों की आवाजाही अधिक होने से न सिर्फ पशुओं की जान को को खतरा है, बल्कि देखरेख को लगाए कर्मचारी भी दहशत में हैं। गोशाला में मात्र एक टिनशेड और दो कमरे बने हैं। इसी में पूरा बजट खपा दिया गया। इतने भारी भरकम बजट में गोशाला के चारों ओर तार फेंसिंग तक नहीं हो पाई। बाद में गोशाला परिसर की तार फेंसिंग कराई गई, वह भी मनरेगा के बजट से। परशुरामपुर के ग्रामीणों का मानना है कि जितना बजट गोशाला बनाने में खर्च होना दिखाया गया है, उससे आधा का भी काम नहीं कराया गया। इसलिए अब बचा-खुचा काम मनरेगा से कराकर अनियमितताओं पर परदा डाला जा रहा है।
बाघ-तेंदुओं की आवाजाही से गायें असुरक्षित
अगर गोशाला में गोवंशीय पशुओं की देखरेदख और सुरक्षा पर बात की जाए तो इसमें भी पूरी तरह लापरवाही बरती गई। गोशाला टाइगर रिजर्व के बराही रेंज के जंगल की सीमा में बनी। गांव वालों के अनुसार यहां से जंगल की दूरी महज 100 मीटर की दूरी पर है। दूर-दूर तक आबादी नहीं है। गोशाला के आसपास बाघ, तेंदुआ समेत अन्य वन्यजीवों की भी चहलकदमी रहती है। तस्करों का भी यहां पूरी तरह जाल बिछा है। माधोटांडा, कलीनगर, शेरपुर से पूरनपुर तक दर्जनों गांवों में बड़ी संख्या में गोवंशीय तस्करी होती है। दो दर्जन गांवों के तस्कर वैसे ही पूरे इलाके में गायों की तलाश में रहते हैं। जंगल से सटे इलाकों में गायें रखे जाने से एक तो इनके तस्करों के हाथों में पहुंचने की आशंका है, दूसरा गायें बच भी गईं तो हिंसक वन्यजीवों से नहीं बचेंगी। गायों के गोशाला में होने से टाइगर रिजर्व के हिंसक पशु जंगल से बाहर निकलेंगे। इन वन्यजीवों से गायों की निगरानी करना और उन्हें सुरक्षित रखना किसी चुनौती से कम नहीे होगा।
कई पशु बीमार..दवा का नहीं इंतजाम
परशुरामपुर गांव में बनाई गई गोशाला में 14 अगस्त को ही 31 गोवंशीय पशु शिफ्ट किए गए हैं। इनके खाने के लिए भूसा और हरा चारे का पुख्ता इंतजाम भी गोशाला में नहीं मिला। नांद में कुछ चारा और भूसा पड़ा था। इसके अलावा वहां स्टॉक खाली था। कई पशुओं के शरीर पर जख्म थे तो कुछ बीमार होने की वजह से जमीन पर बैठे थे। उनके इलाज को दवा का कोई भी इंतजाम गोशाला में नहीं दिखा। ग्रामीणों ने बताया कि पशु चिकित्सक कभी कभार ही आते हैं।
50 वर्षीय मनोहर पर देखरेख की जिम्मेदारी
गोशाला की देखरेख करने की जिम्मेदारी माधोटांडा के निवासी 50 वर्षीय मनोहर लाल निभा रहे हैं। वह अकेेले गोशाला में रहते हैं। उनका कहना था कि जंगल नजदीक होने से उन्हें वन्यजीवों का खतरा रहता है। बोले- वैसे में पशुओं की देखरेख में कोई लापरवाही नहीं बरतता।
एसडीएम खुद पहुंच गए गोशाला
गोशाला की अव्यवस्थाओं को लेकर जैसे ही अमर उजाला ने एसडीएम से उनके मोबाइल फोन पर संपर्क साधा तो उन्होंने तुरंत मामला संज्ञान में लिया। कुछ देर बाद ही वह खुद गोशाला पहुंच गए। उन्होंने घायल पशुओं का अपनी देखरेख में इलाज कराया। साथ ही अन्य खामियां दूर कराने के भी निर्देश दिए।
गोशाला की व्यवस्था के लिए ग्राम पंचायत कर्मचारियों और संबंधित अफसरों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए हैं। मैंने खुद मौके पर पहुंचकर घायल पशुओं का इलाज कराया है। किसी तरह की दिक्कत पशुओं को नहीं होने दी जाएगी। - रामस्वरूप, एसडीएम, कलीनगर
अभी ईको सेंसटिव जोन का दायरा निश्चित न होने से पक्के निर्माण पर रोक नहीं लगाई गई है। जंगल सीमा पर गोशाला बनने से वन्यजीवों के स्वभाव पर इसका असर जरूर पड़ेगा। - डीके गोयल, रेंजर, बराही
मझोला में गोशाला के लिए शुरू हुई जमीन की तलाश
मझोला। नगर पंचायत गुलड़िया भिंडारा में प्रस्तावित गोशाला के लिए जमीन की तलाश शुरू कर दी गई है। ईओ विजय कुमार, तहसीलदार शेरबहादुर सिंह, नायब तहसीलदार दुष्यंत सिंह, कानूनगो मदनलाल, लेखपाल कृष्णकुमार गंगवार ने भगतनिया फार्म, टाडा विजेंसी और रामपुर बोरख गांव पहुंचकर ग्राम समाज की जमीन को देखा। ईओ ने बताया कि जगह को लेकर जल्द ही निर्णय लिया जाएगा। राजस्व विभाग के साथ इसे लेकर मंथन किया जा रहा है। संवाद