गणेश चौथ मेला पिछले 32 वर्षों से जिले का मान बढ़ा रहा है। पहली बार 1984
में गणेश चौथ मेला सिर्फ एक दिन का हुआ था, जिसमें भगवान गणेश की रथ
यात्रा निकाली गई थी। 1985 में सात दिवसीय मेला शहर के मीना बाजार ग्राउंड
में आयोजित हुआ। इसका उद्घाटन तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट असगर अली नकवी ने
किया था। मेला लगवाने की भूमिका युवा जागृति परिषद ने निभाई थी।
जिले का
प्रमुख गणेश चौथ मेला पिछले 32 वर्षों से लग रहा है। इसमें पूरे प्रदेश के
दुकानदार दुकानें लगाते हैं। यह मेला शुरुआत में सात दिन का लगता था। 1992
में मेले को गति मिली और रामलीला मैदान में यह मेला लगा। तब तत्कालीन
शिक्षामंत्री रहे नेपाल सिंह ने इसका उद्घाटन किया था। मेले में भगवान की
गणेश चतुर्थी के दिन धूमधाम से शोभा यात्रा निकालने की भी परंपरा है। हमेशा
से यह यात्रा गणेश चतुर्थी के दिन निकाली जाती है।
शोभायात्रा में
शामिल भगवान गणेश की प्रतिमा को देवहा नदी में विसर्जित किया जाता था,
लेकिन इस साल से शहर के दूसरे छोर स्थित गौहनिया चौराहे के पास बने तालाब
में उसे विसर्जन किया गया। 1999 में यह मेला 22 दिन का लगने लगा। तत्कालीन
युवा जागृति परिषद के अध्यक्ष हरी किशोर रावत ने बताया कि मेले के शुरुआत
में दुकानदारों को बुलाना पड़ता था। इसमें काफी दिक्कत होती थी, लेकिन अब
स्थिति अलग है।
दुकानदारों को अब खुद इस मेले के लगने का इंतजार रहता
है। मेले में 1984 से ही ओम प्रकाश का ढोला का भी आयोजन शुरू हुआ। जो उनके
बाद उनके पुत्र प्रदीप कुमार करते हैं। 1995 में परिषद के मंच पर
सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाने लगीं। 2011 से अखिल भारतीय कवि
सम्मलेन व मुशायरा की शान बढ़ाते आ रहे हैं।
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मेले में सबसे ज्यादा बिकते हैं कप
गणेश
चौथ मेले में कप की दुकानें सबसे ज्यादा लगती है। कमेटी अध्यक्ष बताते है
कि पहले एक या दो दुकानें लगती थीं, अब यहां काफी दुकानें लगने लगी हैं।
मेले में आने वाले लोग सबसे ज्यादा कप खरीदते है।
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झूलों से प्रख्यात है गणेश चौथ मेला
मेले
में कई तरह के झूले लगते हैं। जो दर्शकों को सबसे ज्यादा भाते है। कमेटी
के लोग बताते है के दर्शक पूरे वर्ष गणेश चौथ मेले में लगने वाले झूलों का
इंतजार करते हैं।
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1984 से मेले को लगातार गति
दी जा रही है। शहर में लगने वाला मेला प्रदेश में दूसरे नंबर का है।
वर्तमान परिषद के अध्यक्ष प्रदीप तिवारी बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।
- हरी किशोर रावत, संस्थापक युवा जागृति परिषद।