स्वच्छ भारत अभियान के तहत शहर से गांव तक साफ सफाई रखने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन पीएम व सीएम के इस ड्रीम प्रोजेक्ट पर जिले के अधिकारी बट्टा लगा रहे हैं। गांव में तैनात सफाई कर्मचारियों को विभिन्न कार्यालयों व आवासों से अटैच किया गया है। पंचायती राज विभाग की ओर से जिलेभर में लगभग एक हजार पंचायत सफाई कर्मी तैनात हैं। इन पंचायत सफाई कर्मियों का गांव की गली सड़कों के अलावा सरकारी स्कूल, अस्पताल, आंगनबाड़ी केंद्र, बाजार आदि की सफाई का जिम्मा सौंपा गया है लेकिन जिले के लगभग 80 प्रतिशत गांव में हफ्ते में एक दो बार ही सफाई कर्मी प्रधान एवं कुछ खास सदस्यों के घरों के आसपास सफाई की औपचारिकता निभाते हैं। गांव में लगातार अनुपस्थिति और हर गली कूचे में गंदगी के बाद भी इनका वेतन प्रतिमाह निकल रहा है। दरअसल गांव में इन सफाई कर्मियों के न पहुंचने की सबसे बड़ी वजह है लगभग सौ पंचायत सफाई कर्मियों का विभिन्न अधिकारियों के कार्यालयों, आवासों में अटैच होना। कुछ तो लिखित रूप से अटैच किए गए हैं जबकि अधिकांश अवैध रूप से अटैच हैं।
कहां कहां हैं अटैचमेेंट
पंचायत सफाई कर्मियों का अटैचमेंट डीएम के आवास से लेकर एडीएम, एसडीएम, सीडीओ, डीपीआरओ, बीडीओ, एडीओ सहित लगभग हर स्तर पर है। कोई साहब की सरकारी तो कोई प्राइवेट गाड़ी चला रहा है। कई साहब के अर्दली हैं। कहीं कोई कार्यालय में बाबूगिरी कर रहा तो कोई कंप्यूटर आपरेटर का काम देख रहा है।
पंचायत सफाई कर्मचारियों की विस्तृत सूची बनवाई जा रही है। सूची से स्थिति स्पष्ट होने के बाद अटैचमेंट समाप्त कराकर सभी को गांव में नए सिरे से तैनात किया जाएगा। - शशिकांत पांडेय, डीपीआरओ