पीलीभीत। शहर को स्वच्छ व प्रदूषण रहित बनाने के लिए पांच करोड़ रुपये की लागत से बना फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (एफएसटीपी) नौ माह से ठप पड़ा है। आवासीय और कॉमर्शियल भवन के सेप्टिक टैंक से निकलने वाले मल व गंदे पानी के निस्तारण के लिए इस प्लांट को लगाया गया था। अब प्लांट की अधिकांश मशीनें खराब हो चुकी हैं। ऐसे में मल को नालों के जरिए देवहा नदी में बहाया जा रहा है।
शहर में नगर पालिका के 27 वार्ड हैं। करीब तीन लाख आबादी है। स्वच्छता का ध्यान रखते हुए आवासीय और कॉमर्शियल भवन के सेप्टिक टैंक से निकलने वाले मल और गंदे पानी के निस्तारण के लिए वर्ष 2022 में एफएसटीपी को मंजूरी मिली थी। जल निगम ने शहर से सटे नौगवां पकड़िया क्षेत्र के देवहा पुल के निकट 5.21 करोड़ की लागत से इस प्लांट का निर्माण कराया।
प्लांट को नवंबर 2023 में नगर पालिका को हैंडओवर कर दिया गया। करीब सात माह तक इसे चलाया गया। अब पिछले नौ माह से प्लांट ठप है। इसके पीछे जुलाई 2024 में आई बाढ़ से हुई तबाही को वजह बताया जा रहा है। प्लांट ठप होने से टैंकों से निकलने वाले मल को नदी में सीधे डाला जा रहा है। इससे बीमारियां फैलने की आशंका बढ़ गई है।
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प्रस्ताव को मंजूरी का इंतजार, समस्या जस की तस
जुलाई 2024 में आई बाढ़ के बाद देवहा नदी के उफनाने से प्लांट को नुकसान पहुंचा था। मशीनें खराब होने के साथ प्लांट तक जाने वाला रास्ता भी क्षतिग्रस्त हो गया। विभाग का दावा है कि मरम्मत के लिए 51 लाख की धनराशि का प्रस्ताव भेजा गया है। मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है।
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कंडम हो रहे प्लांट पर खड़े दो ट्रक
प्लांट का कार्य ठप होने से अव्यवस्थाएं हावी हैं। जिम्मेदारों की अनदेखी से प्लांट में खड़े दो ट्रक भी कंडम हो रहे हैं। ट्रकों की कोई देखरेख नहीं की जा रही है। लंबे समय से ट्रक को खुले में खड़ा किया गया है। मल आदि को नगर पालिका के छोटे वाहनों से ले जाकर नदी में बहाया जा रहा है।
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वर्जन
एफएसटीपी प्लांट के दोबारा से संचालन के लिए मरम्मत का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। धनराशि स्वीकृत होने के बाद मरम्मत कराकर प्लांट का दोबारा संचालन शुरू कराया जाएगा। - आशुतोष गुप्ता, प्रभारी ईओ नगर पालिका परिषद/ एसडीएम न्यायिक
देवहा पुल के नीचे क्षतिग्रस्त पड़ा एफएसटीपी प्लांट।संवाद