पीलीभीत। होली का त्योहार नजदीक आते ही मिलावटखोरों ने बड़े पैमाने पर अपना मिलावटी सामान लाकर बाजार को पाट दिया है। हरी सब्जी हो, सरसों का तेल या फिर देसी या डालडा घी। सबमें जमकर मिलावट हो रही है। और तो और, मिलावटखोरों ने बाजार में मिलावटी बेसन और मसाले भी बाजार में उतार दिए हैं। शहर के अंदर इनको सस्ते दामों में बेचा जा रहा है। एफएसडीए का अभियान केवल मिठाई की दुकानों तक सीमित है। तेल मसालों के नमूने न लेकर एफएसडीए ने एक तरह मिलावटखोरों को होली के सीजन में एक तरह से वॉक ओवर दे रखा है। इसका परिणाम यह है कि पूरे बाजार पर मिलावटखोरों का कब्जा है। आम नागरिकों को पूरे पैसे खर्च करने के बाद भी खाने- पीने की शुद्ध चीजें नहीं मिल पा रही हैं।
शहर के लोहामंडी, अनाज मंडी और किराना बाजार समेत अन्य मुख्य मार्ग की दुकानों पर खाने के लिए खरीदे जाने वाले मसालों में मिलावट का खेल चल रहा है। बाजार में पिसी हल्दी 140 रुपये किलो मिल रही है। वहीं खड़ी हल्दी के रेट 170 रुपये प्रति किलो हैं। अब अगर खड़ी हल्दी में पिसवाने का खर्च मिला दिया जाए तो पिसी हल्दी के रेट 170 रुपये प्रति किलो से अधिक होने चाहिए। मगर, मिलावटखोरों ने हल्दी में केमिकल युक्त कलर में चावल की कनकी मिलाकर बेचना शुरू कर दिया है। लाल मिर्च का रेट 200 रुपये किलो है। वहीं खड़ी मिर्च 220 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रही है। पिसा गर्म मसाला 800 रुपये किलो है। वहीं खड़ा गर्म मसाला 900 रुपये किलो है। इस हिसाब से देखा जाए तो पिसा खरीदने के बजाय खड़ा मसाला खरीदने में ही फायदा है। कम से कम इसमें शुद्धता की तो गारंटी है। पिसे मसाले में बड़े पैमाने पर मिलावट है। मगर, सस्ता होने की वजह से आम नागरिक खासतौर से महिलाएं जाने-अनजाने में घर में पीसने की मेहनत से बचने के लिए पिसा मसाला खरीदकर बीमारियों को न्योता दे रही हैं। इतना ही नहीं, त्योहारी बाजार में मिलावटी हल्दी, लाल मिर्च, धनिया, सब्जी के गर्म मसाले, काली मिर्च और सौंफ भी उपलब्ध है। ठेलों से लेकर परचून की दुकानों तक इनको बेचा जा रहा है। शहर के एक दुकानदार ने नाम न छापने की गुजारिश पर बताया कि मसालों में बुरादा से लेकर, पपीते के बीज, अरारोट, चावल की कनकी मिलाई जाती है। यह न केवल खाने के स्वाद को फीका करता है, बल्कि सेहत को भी नुकसान पहुंचाता है।
पिसे धनिया में मिर्च के डंठल
बाजार में बिकने वाले पिसे हुए धनिया में लाल मिर्च के डंठल मिक्स कर उनकी पिसाई की जाती है। फिर उनको बेचा जाता है। ग्राहक इसकी पहचान आसानी से नहीं कर पाता।
बेसन में अरारोट और ऑटा
बेसन में अरारोट और चक्की का ऑटा मिलाकर बेचा जा रहा है। बाजार में बेसन के रेट 80 रुपये किलो हैं। वहीं आटा 25 से 28 रुपये प्रति किलो मिलता है। अरारोट की कीमत भी कम है। मिलावटी बेसन 50 से 60 रुपये किलो के हिसाब से मिल जाता है।
हल्दी में मिलाया जाता है कैमिकलयुक्त रंग
हल्दी में कैमिकलयुक्त रंग मिलाकर मक्के का पाउडर और चावल की कनकी मिलाई जाती है। इसके अलावा लाल रंग फटकी चावल की भूसी भी मिलाई जा रही है। इसको पीले कलर से रंगा जाता है। इसके खाने से लिवर सिकुड़ने के साथ कई बीमारियां होने लगती है।
लिवर, फेफड़े और हार्ट पर असर
फिजीशियन डॉ. आदित्य पांडे का कहना है। कि खाद्य पदार्थो में तेल मसाले में मिलावट सेहत के लिए हानिकारक है। मिलावटी खाद्य पदार्थ लीवर, फेफड़े और हार्ट पर सीधा प्रभाव डालते हैं। मिलावटी सामान खाने से बीमारी का पता भी काफी देर से चलता है। आज के दौर में पेट की बीमारियां बढने की वजह ही मिलावट है। मिलावटी पदार्थों में असली, नकली का फर्क करना खाने वालों के लिए भी कठिन है।
ऐसे करें मिलावटी मसालों की पहचान
धनिया: मिलावट पहचानने के लिए थोड़े से धनिया पाउडर को गर्म पानी पर डालें। यदि इसमें भूसी और बुरादा मिला होगा तो वह पानी की सतह पर तैरने लगेगा।
मिर्च पाउडर: पानी भरे गिलास में डालें। इसमें मिला ईंट का बुरादा पानी की सतह पर आ जाएगा।
जीरा: हथेलियों पर जीरे को रगड़ें। अगर हाथ काले हो जाएं तो समझ लें कि यह मिलावटी है।
हींग: माचिस की जलती तीली हींग के करीब ले जाने पर उसकी लौ चमकदार हो जाती है। हींग नकली होगी तो ऐसा नहीं होगा।
मिलावटी सामान बेचने वालों के विरुद्ध अभियान चलाया जा रहा है। जनता को इस बारे में जागरूक भी किया जा रहा है। जनता से अपील है कि वह मिलावटी सामान न खरीदे। कहीं कोई दिक्कत हो तो एफएसडीए विभाग से संपर्क करे। शशांक त्रिपाठी, अभिहीत अधिकारी एफएसडीए